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Ganesh Ji Ki Aarti Lyrics: गणेश जी की आरती, जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा
Ganesh Ji Ki Aarti: गणेश जी की आरती करने से अनेक लाभ होते हैं। सबसे पहले, यह आरती मानसिक शांति और संतुलन प्रदान करती है। गणेश जी विघ्नहर्ता हैं, इसलिए उनकी पूजा से जीवन की बाधाओं और कठिनाइयों में कमी आती है। आरती करते समय ध्यान केंद्रित करने से एकाग्रता और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
आरती का नियमित अभ्यास परिवार के सदस्यों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है, जिससे पारिवारिक रिश्ते सुदृढ़ होते हैं। यह मानसिक तनाव को कम करने और खुशहाली की भावना को बढ़ाने में भी सहायक होती है।

गणेश जी की आरती करने से मनोबल में वृद्धि होती है और लक्ष्य प्राप्ति के लिए प्रेरणा मिलती है। धार्मिक विश्वास और आदर्शों के पालन से जीवन में नैतिकता और अनुशासन की भावना विकसित होती है।
इसके अतिरिक्त, गणेश जी की आरती से पुण्य और धार्मिक लाभ प्राप्त होता है, जो व्यक्ति के आत्मिक उन्नति में सहायक होता है। कुल मिलाकर, यह आरती जीवन को सुसंगठित और सुकून भरा बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
Ganesh ji ki aarti: Jai Ganesh Jai Ganesh Deva
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
'सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
भगवान गणेश की जय, पार्वती के लल्ला की जय
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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