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Women's Sexuality: विमेन सेक्सुअलिटी के वो मिथक, जिसके बारें में पुरुषों को युवावस्था से ही बताया जाता है
लड़कों को हमेशा घर से ही लड़कियों को लेकर ये बात सिखा दी जाती है, वो उनसे बेस्ट होते हैं। लड़कियों को लेकर कई तरह के मिथ लड़के जैसे-जैसे युवा होते जाते हैं और पुरूष बनते हैं उनके मन में बैठा दी जाती हैं। जो लड़कियों और महिलाओं को लेकर गलत होते हैं, लेकिन पुरूष उनको सही मानते आ रहे होते हैं। लेकिन इसका खामियाजा बाद में सिर्फ और सिर्फ महिलाओं को ही भुगतना पड़ता है। जब लड़का अपनी किशोरावस्था तक आता है तब तक उसके पास उन चीज़ों की एक अच्छी लिस्ट होती है जिन पर वो पूरी तरह से विश्वास करते हैं। अगर वो चीजें उनको महिलाओं में नहीं मिलती या फिर कुछ बातें जो महिलाओं को लेकर वो नहीं मानते हैं, महिलाओं में वो चीजें मिलती हैं तब वो महिलाओं को ही गलत ठहराने लग जाते हैं।

आइये जानते हैं उन्ही मिथक के बारें में जो पुरूषों के दिमाग में युवावस्था से बैठाई जा रही होती हैं-

महिलाओं के पीएमएस का मजाक उड़ाना
एक महिला का शरीर बचपन से लेकर युवा होने तक कई तरह के परिवर्तनों से गुजरता है। जिसकी शुरूआत मंथली पीरियड से होती है, फिर स्तनों का उभरना, गर्भावस्था के समय, और जब उसका मेनोपॉज का वक्त शुरू होता है। वहीं पुरुषों में इस तरह के हार्मोनल चेंज नहीं होते हैं, जो दौर से एक महिला गुजरती है, उसके बारें में एक पुरूष एहसास भी नहीं कर सकता। इसलिए, वे पीएमएस के दौरान महिलाओं में होने वाले हार्मोनल बदलावों को नही समझ पाते, लेकिन इस दौरान वो महिला के मूड में बदलावों को गलत तरीके से समझते हैं, उनका मजाक तक उड़ते हैं। पुरुष महिलाओं के मूड चेंज को चिड़चिड़ापन समझ लेते हैं।

अच्छी महिला कभी सेक्स को लेकर खुल कर बात नहीं करती है
पुरुष सेक्स के बारे में खुलेआम बातें करते हैं, लेकिन अगर एक महिला सेक्स को लेकर बात करती है तो पुरूष इसको गलत समझ लेते हैं। उनका मानना होता है कि महिलाएं ऐसा नहीं कर सकतीं है। अगर महिला ऐसा करती है तो वो हाइपरसेक्शुअल है। पुरूष सेक्स को लेकर बात करने वाली महिला को गलत तरीके से देखना शुरू कर देते हैं।

महिलाएं कभी सेक्स के लिए मना नहीं करेंगी
हमेशा से पुरूषों को ये बताया जाता रहा है कि महिलाएं कोमल होती है। वो बहुत सेंसेटिव होती है। उनके साथ पुरूष सहानुभूति वाला व्यवहार करें। उनके अंदर सेक्स भरा होता है, जिसके लिए वो कभी मना नहीं कर सकती है। हालांकि, ये एक गलत धारणा है, जो पुरुषों को महिलाओं को लेकर बना दी गई होती हैं। लेकिन ऐसे बहुत सारे शोध हुए हैं, जो ये बताते हैं कि सहानुभूति और सेक्स की चाहत लिंग के आधार पर नहीं होती है।

महिला वर्जिन नहीं है तो उससे शादी नहीं करनी
महिलाओं की वर्जिनिटी को हमेशा देश और धर्म में उसके संस्कारों से जोड़कर देखा जाता है। लड़कों को हमेशा से ये बताया जाता है कि उसकी शादी वर्जिन लड़की से ही होनी चाहिए। अगर लड़की वर्जिन नहीं हैं तो उसका कैरेक्टर खराब हैं। सेक्स और महिलाओं को लेकर ये मिथक आज के दौर में भी पुरुषों के एक बड़े तबके के दिमाग में मौजूद है।

महिलाएं सिर्फ बच्चा पैदा करने की मशीन है
इस तरह की सोंच रखने में सिर्फ पुरुषों का दोष नहीं है। इसमें संस्कृतियों और रीति-रिवाजों का बड़ा रोल है। शादी के बाद ही महिलाओं से लोग उम्मीद करने लगते है कि वो प्रेगनेंट हो जाए, अगर उसकी मर्जी नहीं है या फिर किसी और तरह की समस्या है तो इसका सारा दोष लड़कियों पर ही मढ़ा जाता है। ये काम करने में माहिर होती है उस घर की महिलाएं। घर की महिलाएं ही नई दुल्हन पर बच्चा पैदा करने का दबाव डालती हैं। पुरूष अपने युवावस्था से ही इस तरह की बातें अपने घर में देखते आ रहे होते हैं, तो उनके दिमाग में यही रहता है कि औरत बच्चा पैदा करने की मशीन होती है।

महिलाओं को कैजुअल सेक्स नहीं पसंद
समाज के द्वारा ही महिलाओं को लेकर ये गढ़ दिया गया है कि महिलाएं खुद से सेक्स के लिए अप्रोच नहीं कर सकती है। वो कैजुअल सेक्स नहीं कर सकती हैं खासकर जब वो किसी एक पुरुष के साथ रिश्तें में ना हों। वहीं पुरूष सेक्स करके अपने मर्दानगी दिखा सकते हैं।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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