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पार्टनर के जानें के बाद बुजुर्गों को तोड़ देता है ‘विडोवुड इफेक्ट’, पुरुषों पर होता है गंभीर असर
शादी एक ऐसा बंधन है, जो दो लोगों को एक साथ जिंदगीभर जोड़े रखता है। प्यार से विश्वास से, खट्टे-मिठे पलों के साथ जीवनसाथी के साथ जिंदगी के कठिन रास्ते पर चलना आसान हो जाता है। लेकिन लाइफ के एक ऐसे मुकाम पर आकर जहां कपल्स को एक दूसरे की सबसे ज्यादा जरूरत होती है और उस वक्त दोनों में से कोई एक का साथ छूट जाए तो बाकी बची जिंदगी कांटों की तरह लगने लगती है।

डेनमार्क में हुए एक रिसर्च के अनुसार, अगर पति या फिर पत्नी दोनों में से कोई एक का साथ छूट जाता है तो दूसरे पर इसका गहरा असर पड़ता है। महिला से अधिक पुरूष अगर अपनी पत्नी से बिछड़ जाता है तो उस पर इसका निगेटिव इंपैक्ट दिखने को मिलता है। लाइफ पार्टनर के चले जाने के बाद को खुद को कमजोर महसूस करने लगता है, उसके स्वास्थ्य में भी गिरावट होने लग जाती है, उसे ऐसे लगता है कि जीवन में कुछ बचा नहीं है। इसे मेडिकल साइंस में 'विडोवुड इफेक्ट' कहते हैं।
क्या है विडोवुड इफेक्ट ? (Widowwood Effect )
विडोवुड इफेक्ट वो कंडीशन है, जब पार्टनर के दुनिया से चले जाने के बाद दूसरा पार्टनर अंदर से खोखला होने लग जाता है, उसको अपना जीवन नीरस लगने लगता है। उसे कुछ भी अच्छा या पंसद नहीं आता है। उसकी हेल्थ में भी गिरावट आने लग जाती है। वो अकेला हो जाता है, और खुद को कमजोर महसूस करने लग जाता है।

विडोवुड इफेक्ट (Widowwood Effect) का इन फैक्टर्स का पड़ता है असर
रिसर्च में पाया गया है कि विडोवुड इफेक्ट से पुरूष अधिक प्रभावित होता है। इस पर कई तरह के फैक्टर्स काम करते हैं। जिसमें अहम है कि लाइफ पार्टनर की मौत कि तरह से हुई है। मौत के तरीके का सबसे ज्यादा असर दूसरे पार्टनर पर होता है। ये पार्टनर को इमोशनली तोड़ कर रख देता है। जिससे वो डिप्रेशन में जाने लग जाते है। सबसे अहम ये है कि ऐसे बुजुर्ग डाॅक्टर्स के पास भी इलाज करने से बचते हैं। जिसकी वजह से उनकी सेहत पर बुरा असर होता है, और दिन ब दिन बीमार होते जाते हैं।

परिवार वाले बन सकते हैं बड़ा सहारा
जीवनसाथी के जाने के बाद ऐसे बुजुर्गों का साथ उनका परिवार दे सकता है। अकेले रह गये बुजुर्ग के लिए उनके बच्चों की जिम्मेदारी है कि वो अपने माता या पिता का सहारा बनें। उनका साथ दे। उनको अकेला ना छोड़ें।
आप उनको किसी ना किसी काम में बिजी रखने की कोशिश करें।
घर में बुजुर्ग अपने पोता-पोती के साथ खेलना शुरू करें, उनके बात करना शुरू करें। कोई पालतू जानवर पाल लें, जिससे अकेलापन महसूस नहीं होगा। पुराने दोस्तों से मिलने के लिए प्रोत्साहित करें। जिससे वो अपने दुख दर्द बांट सकें।



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