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World IVF Day 2024: आईवीएफ मतलब कंफर्म प्रेग्नेंसी? फर्टिलिटी एक्सपर्ट से जानें ऐसे ही सवालों के जवाब
World IVF Day 2024: इंफर्टिलिटी से जूझ रहे कपल्स के लिए आईवीएफ (In vitro fertilization) तकनीक किसी वरदान से कम नहीं हैं। लेकिन इसे लेकर आज भी लोगों के मन में कई तरह की गलतफहमियां बसी हुई है। जब कोई कपल इस प्रोसेस के जरिए कंसीव करने का फैसला करता है, तो सबसे बड़ा सवाल यह होता है कि इससे पैदा हुआ बेबी नॉर्मल होता है? यह सवाल इसलिए उठता है क्योंकि इसमें अंडों के फर्टिलाइजेशन की प्रक्रिया सामान्य नहीं होती। कई दशकों से नि:संतान दंपतियों की गोद भर चुकी आईवीएफ को लेकर आज भी लोग कई तरह के सवाल करते है
जयपुर स्थित दिवा हॉस्पिटल एंड आईवीएफ सेंटर की गायनाकॉलोजिस्ट शिखा गुप्ता ने बताया कि इंफर्टिलिटी से जूझ रहे कई कपल जब इस प्रोसेस के जरिए माता-पिता बनने का सोचते हैं, तो इससे गुजरने से पहले उनके मन में कई तरह के सवाल होते हैं।

आइए आज वर्ल्ड आईवीएफ डे के मौके पर जानते हैं फर्टिलिटी एक्सपर्ट डॉक्टर शिखा से जानते हैं कि आईवीएफ को लेकर सबसे ज्यादा कौनसे सवाल किए जाते हैं?
सवाल : IVF प्रोसेस मतलब कंफर्म प्रेग्नेंसी?
जवाब: डॉ. शिखा गुप्ता के अनुसार IVF का सक्सेस रेट दो महत्वपूर्ण कारकों पर निर्भर करता है। पहला लैब में तैयार किया गया भ्रूण किस ग्रेड का है और दूसरा महिला की उम्र क्या है? आमतौर पर कम उम्र की महिलाओं में आईवीएफ प्रक्रिया ज्यादा सक्सेसफुल रहती है और ज्यादा उम्र की महिलाओं में यह प्रक्रिया कम सफल होती है। हालांकि कई बार होता है कि फर्स्ट अटैम्प में यह प्रोससे अगर असफल रहें तो महिलाएं सेकेंड अटैम्प में आसानी से गर्भधारण कर लेती हैं।
सवाल : क्या हर महिला आईवीएफ करवा सकती है?
जवाब: डॉक्टर शिखा के मुताबिक यह जरूरी नहीं है कि हर महिला आईवीएफ प्रोसेस करवा सकती हैं। ऐसे कई कारण होते हैं, जब हम महिला को आईवीएफ के जरिए गर्भधारण करने की सलाह नहीं देते हैं। जैसे अगर कोई महिला बहुत ज्यादा उम्र की हैं और अंडों का ग्रेड अच्छा नहीं है। वहीं अगर कोई किडनी डिजीज या हार्ट डिजीज की मरीज हैं, तो ऐसे में आईवीएफ कराना मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा अगर किसी महिला को सीवीयर पीसीओएस (पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम ) की समस्या है, तो इस स्थिति में हम महिला को सेरोगेसी या अडॉप्शन की ही सलाह देते हैं।
सवाल : आईवीएफ से जुड़वां होने की कितनी संभावना होती है?
जवाब : डॉक्टर बताती हैं कि यह सच है कि आईवीएफ ट्रीटमेंट में मल्टीपल प्रेग्नेंसी होना कॉमन है। क्योंकि आईवीएफ में महिला को कंसीव कराने के लिए एडवांस एआरटी तकनीकों का उपयोग करके दो एम्बियों (दो भ्रूण) को भी इम्प्लांट किया जाता है। इस वजह से ज्यादात्तर कपल को आईवीएफ में जुड़वा बच्चे होते हैं।
सवाल आईवीएफ में सीज़ेरियन डिलीवरी ही होती है?
जवाब : डॉक्टर शिखा गुप्ता बताती हैं कि IFV प्रोसेस से गर्भधारण करने वाली महिलाएं बिल्कुल सामान्य गर्भावस्था की तरह ही बच्चे को 9 महीने में गर्भ में रखती हैं और बच्चे का सामान्य रुप से विकास होता है। आईवीएफ में डिलीवरी भी सामान्य रुप से होती है अगर प्रेग्नेंसी में किसी तरह की कॉम्पिलिकेशन हैं, जैसे ब्लड प्रेशर हाई है या शुगर बढ़ा हुआ है, तो सीजेरियन डिलीवरी की संभावना बढ़ जाती है।
सवाल: क्या आईवीएफ का मतलब फुल टाइम रेस्ट होता है?
जवाब: आईवीएफ केवल प्रेग्नेंट होने की प्रक्रिया है। अगर एक बार भ्रूण गर्भाशय में आ गया तो इसके बाद बच्चे का विकास सामान्य प्रेग्नेंसी की तरह ही होता है। सामान्य प्रेग्नेंसी में कॉम्पिलकेशन होती है और फुल टाइम बेड रेस्ट जैसी सिचुएशन आती है। बेड रेस्ट की नौबत प्रेग्नेंसी के दौरान कॉम्पिलिकेशन की वजह से होती है।



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