Latest Updates
-
Aaj Ka Rashifal 4 April 2026: शनिवार को इन 5 राशियों पर होगी धनवर्षा, जानें अपनी राशि का भाग्य -
चेहरे पर पड़े चेचक के दाग हटाने के 5 घरेलू उपाय, जिद्दी गड्ढों और माता के निशान से पाएं छुटकारा -
क्यों मनाया जाता है World Rat Day? सबसे पहले किस देश में पैदा हुए चूहे, कैसे पूरी दुनिया में पहुंचे? -
International Carrot Day 2026: 4 अप्रैल को ही क्यों मनाया जाता है विश्व गाजर दिवस? जानें रोचक कहानी -
Bridal Blouse Designs: लेटेस्ट ब्राइडल ब्लाउज बैक डिजाइन, डोरी से लेकर हैवी एम्ब्रॉयडरी तक, देखें 7 पैटर्न्स -
कंडोम की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं? जानें ईरान-इजरायल युद्ध का असर और कपल्स के लिए सेफ्टी टिप्स -
Musibat ki Dua: दुख, तंगी और गम से निजात की इस्लामी दुआएं, इनके जरिए होती है अल्लाह से सीधी फरियाद -
कहीं आप प्लास्टिक राइस तो नहीं खा रहे आप? इन 5 आसान तरीकों से करें असली-नकली की पहचान -
Good Friday 2026: 'सब पूरा हुआ'... इन खास संदेशों और कोट्स के साथ अपनों को भेजें गुड फ्राइडे की शुभकामनाएं -
Aaj Ka Rashifal 3 April 2026: आज इन 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, जानें अपनी राशि का हाल
जानें क्यों होती है प्रेगनेंसी के दौरान ब्लीडिंग
प्रेगनेंसी के दौरान पहली तिमाही में अक्सर वजाइनल ब्लीडिंग (योनि से रक्तस्राव) होता है। यह एक सामान्य ब्लीडिंग होती है और इससे किसी तरह की परेशानी नहीं होती है। पर यदि प्रेगनेंसी की दूसरी या तीसरी तिमाही में ब्लीडिंग हो तो फिर किसी गंभीर समस्या की संभावना बन जाती है। मालूम हो कि ब्लीडिंग होने के कई कारण हो सकते हैं। आमतौर पर ब्लीडिंग किसी तरह के इंफैक्शन, तनाव से हार्मोन में परिवर्तन और गलत तरीके से शारीरिक संबंध बनाने से होती है।
अगर गर्भावस्था के पहले हाफ में ब्लीडिंग हो तो इससे निम्न समस्याएं हो सकती हैं-
1. मिसकरिज (गर्भपात): ब्लीडिंग मिसकरिज की निशानी है, पर इसका मतलब यह नहीं कि मिसकरिज तय है। शोध से पता चला कि 20 से 30 प्रतिशत महिलाओं को गर्भावस्था के शुरुआती दिनों में ब्लीडिंग की शिकायत रहती है। इनमें से 50 प्रतिशत महिलाओं के साथ ब्लीडिंग होने के बावजूद भी मिसकरिज नहीं होता है। फिर भी बेहतर होगा कि आप एहतियात बरतें और सावधान रहें।
2. एक्टापिक प्रेगनेंसी: एक्टापिक प्रेगनेंसी वो प्रेगनेंसी है, जो यूटेरस के बाहर विकसित होती है। ज्यादातर एक्टापिक प्रेगनेंसी के लिए फलोपीअन ट्यूब जिम्मेदार होता है। मिसकरिज की तुलना में एक्टापिक प्रेगनेंसी काफी असामान्य है और 60 में से एक मौके पर ही ऐसा होता है।
3. मोलर प्रेगनेंसी: बहुत कम मौकों पर ही ऐसा होता है कि ब्लीडिंग के लिए मोलर प्रेगनेंसी जिम्मेदार हो। मोलर प्रेगनेंसी को मोल भी कहा जाता है और इसमें भ्रूण की जगह एब्नॉर्मल टिशू विकसित हो जाता है। कई बार इसे जेस्टेशनल ट्रोफोब्लास्टिक डिजीज (जीटीडी) भी कहा जाता है।

अगर प्रेगनेंसी के दूसरे हाफ में ब्लीडिंग हो तो निम्न समस्या हो सकती है-
1. प्लासेंटल अब्रप्शन: लेबर के दौरान या उससे पहले प्लासेंटा का यूटरिन वॉल से अलग हो जाने के कारण भी वजाइनल ब्लीडिंग होती है। सिर्फ एक प्रतिशत महिलाओं में ऐसा देखने को मिलता है। आमतौर पर यह प्रेगनेंसी के आखिरी 12 हफ्ते में होता है।
2. प्लासेंटा प्रिविआ: प्लासेंटा प्रिविआ उस समय होता है, जब प्लासेंटा यूटेरस में काफी नीचे आ जाता है और गर्भाशय को आंशिक रूप से या पूरी तरह से ढक लेता है। यह एक गंभीर समस्या है और इसके लिए तुरंत जरूरी कदम उठाना चाहिए। 200 प्रेगनेंसी में से सिर्फ एक में ही ऐसा देखने को मिलता है। इसमें बिना दर्द की ब्लीडिंग होती है।
3. प्रीटर्म लेबर: वजाइनल ब्लीडिंग लेबर का भी संकेत हो सकता है। लेबर शुरू होने से कुछ हफ्ते पहले से म्यूकस प्लग निकलता है। यह आमौतर पर थोड़ा म्यूकस और खून से बना होता है। अगर यह काफी पहले हो जाए तो समझिए आप प्रीटर्म लेबर में प्रवेश कर रहे हैं। ऐसे में जल्द ही आपको फिजिशियन से परामर्श लेना चाहिए।
ब्लीडिंग से नुकसान हो भी सकता है और नहीं भी। अगर आप ब्लीडिंग से जूझ रही हैं तो नीचे लिखी बातों का ख्याल रखें।
1. अगर ब्लीडिंग हो रही है, तो आपको पैड या पैंटी लाइनर जरूर पहनना चाहिए। इससे आपको पता चल जाएगा कि कितनी ब्लीडिंग हो रही है और किस प्रकार की ब्लीडिंग हो रही है।
2. कभी भी टैंपान न पहनें। वजाइनल एरिया में डूश न करें और न ही ब्लीडिंग के दौरान शारीरिक संबंध बनाएं।
3. ब्लीडिंग के दौरान अगर आप अन्य किसी तरह का लक्षण महसूस करें तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें।



Click it and Unblock the Notifications











