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बच्चों के लिए कितना सुरक्षित है डिओडरेंट का यूज, समझें यहां
आधुनिक समय में डिओडरेंट का इस्तेमाल शौक के साथ जरूरत बनता जा रहा है। क्यूंकि पहले से हमारे खानपान और लाइफस्टाइल में बदलाव आया है। ऐसे में पसीने की बदबू आने की समस्या भी बढ़ने लगी है। लेकिन क्या आपने कभी ये नोटिस किया कि ज्यादातर डिओडरेंट पर keep out of reach of children लिखा रहता है, यानि इसे बच्चे की पहुंच से दूर रखें। फिर भी हम इसे बच्चों से दूर रखने की बजाय उन्हें इसका इस्तेमाल करने की इजाजत दे देते है। जबकि ब्रिटेन में एयरोसोल डिओडोरेंट सूंघने के बाद एक 14 साल की बच्ची की कार्डियक अरेस्ट से मृत्यु हो गई थी। उस बच्ची की मौत के बाद उसके पेरेंटस लोगों को डिओडोरेंट से होने वाले नुकसान के प्रति आगाह किया है। यहां हम आपको बताएंगे कि बच्चों के लिए डिओडरेंट का इस्तेमाल क्यूं सुरक्षित नहीं है।

डिओडरेंट क्या काम करता है
सबसे पहले सवाल ये उठता है कि डिओडरेंट का आखिर काम क्या होता है? डिओडरेंट मूलतः खूश्बू से भरे होते है, जो दुर्गंध को खत्म करने का काम करता हैं। डिओडरेंट का उपयोग पसीने को कम करने के लिए खास कर अंडर आर्म्स के आस-पास किया जाता है। लेकिन बच्चों को इसके उपयोग से बचाना चाहिए। एक्सपर्ट की मानें तो डिओडरेंट भले ही पसीने को कंट्रोल करता है, लेकिन इससे आपके शरीर को नुकसान पहुंचता है। क्यूंकि,पसीने के जरिए शरीर से बहुत सारे टॉक्सिन बाहर निकलते हैं जिनकी वजह से आपकी सेहत दुरस्त रहती है। ऐसा ही बच्चों के साथ भी होता है। और आम वयस्क का शरीर तो इसे बर्दाश्त भी कर सकता है लेकिन एक बच्चे का अविकसित शरीर इसकी वजह से कई बार मुश्किलों में पड़ सकता है।
डिओडरेंट में कौन-से हानिकारक तत्व होते है
एल्युमिनियम
डिओडरेंट में जो एल्युमिनियम मौजूद होता है वो नमक के रूप में आता है जो कि बच्चे की स्किन की सरफेस पर बैठ जाता है और पसीने को रोक देता है। बल्कि कई रिपोर्टस में तो इस बात का भी दावा किया गया है कि डिओडरेंट में मौजूद एल्युमिनियम तत्व खतरनाक कैंसर सेल्स को बनाने लगते हैं। क्यूंकि इस मेटल की वजह से शरीर के जीन्स में अस्थिरता आ जाती है और इस वजह से ट्यूमर और कैंसर कोशिकाओं में वृद्धि होने लगती है।
पैराबैन
पैराबैन का भी उपयोग डिओडरेंट में किया जाता है, जिसका मुख्य काम बैक्टीरिया आदि से शरीर को बचाना है। लेकिन जब ये शरीर में जाता है तो कैंसर सेल्स को बढ़ावा देने लगता है। और क्योंकि, अंडर आर्म्स का एरिया काफी गर्मी भरा होता है इसलिए वहां पर खतरा काफी ज्यादा होता है और ये भी कैंसर का कारण बन सकता है।
ट्राइक्लोसैन
डियो और एंटीपर्सपिरेंट समेत कई ब्यूटी प्रॉडक्ट्स में ट्राइक्लोसैन का इस्तेमाल होता है ताकि इन प्रोडक्टस को बैक्टीरियल संक्रमण से बचाया जा सके। ट्राइक्लोसैन के हार्मोन एक्टिविटी में रुकावट पैदा कर सकता है और थायरॉयड के फंक्शन को भी प्रभावित करता है।
बच्चों के लिए डिओडोरेंट
बच्चे आम तौर पर 9 और 14 साल की उम्र के बीच प्यूबर्टी में प्रवेश करते हैं। इस समय के आसपास, वे अपने शरीर के बारे में अधिक जागरूक हो जाते हैं और शरीर की गंध विकसित करना शुरू कर सकते हैं। वे पसीने और सूंघने के बारे में आत्म-जागरूक महसूस कर सकते हैं। ऐसे में जब बच्चा मेंटली तैयार होता है तभी उसके लिए डिओडरेंट सुरक्षित है। वैसे, ऐसे कई सारे ब्रांड है जो खासकर यूथ के हिसाब से डिओडरेंट बनाते हैं।
सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं
ऐसे छोटे बच्चे जो स्प्रे का सही तरीके से उपयोग करना नहीं जानते, उन्हें एयरोसोल स्प्रे के संपर्क में आने से बचाना चाहिए। क्यूंकि बहुत ज्यादा एयरोसोल डिओडोरेंट सूंघने से श्वांस संबंधी परेशानियां हो सकती है। कुछ मामलों में, डिओडोरेंट में मौजूद कैमिकल्स के कारण मतली, उल्टी या दस्त हो सकते हैं। इसलिए अगर आपको लगता है कि आपके बच्चे को डिओडोरेंट से नैगेटिव रिएक्शंस हो रहे है, तो तुरंत इसका इस्तेमाल बंद कर दें और अपने पीडियाट्रिशन से बात करें।



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