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Exclusive: गर्मी की छुट्टियां हुई खत्म, स्कूल टीचर से ही जानें बच्चे को पहले दिन के लिए कैसे करें तैयार
Exclusive Interview With Presentation Convent School Teacher Miss Pratibha: देश के कई क्षेत्रों में भीषण गर्मी को देखते हुए स्कूल के बच्चों को डेढ़ से दो महीने की छुट्टियाँ दी जाती हैं। गर्मियों की छुट्टियों से जुड़ी यादें जीवन भर हम सभी के साथ रहती है। बच्चे इन छुट्टियों में घुमने जाते हैं, कोई नई हॉबी सीखते हैं, और खेल कूद करते हैं।
1 जुलाई से स्कूल खुलने जा रहे हैं और बच्चों को वापस से स्कूल के रूटीन और मूड में आने में दिक्कत होती हैं। छुट्टियों में देर तक सोना, पढ़ाई के लिए कम समय तक बैठना या दिनभर खेलने की आदतें स्कूल शुरू होते ही परेशानी का सबब बनती हैं।
ऐसे में स्कूल की टीचर्स ही ये बता सकती हैं कि बच्चों को स्कूल रीओपन के लिए किस तरह की तैयारियां करनी चाहिए। दिल्ली के प्रेजेंटेशन कॉन्वेंट स्कूल, नई दिल्ली की टीचर मिस प्रतिभा कुछ ऐसे पॉइंट्स बता रहीं हैं जो बच्चों और उनके पेरेंट्स को स्कूल रीओपनिंग के नज़रिए से मदद करेंगे -

स्कूल होमवर्क
इस बात को सुनिश्चित करें कि हर विषय का गृहकार्य स्कूल खुलने से पहले ही समाप्त हो जाए ताकि स्कूल खुलने के बाद बच्चा नए पाठ्यक्रम पर ध्यान दे सकें।
स्कूल खुलने से पहले ही अपने बस्ते, पेंसिल बॉक्स, टिफ़िन बॉक्स और पानी की बोतल को निकाल साफ़ कर लें। अगर कुछ टूट गया है या पुराना हो गया है, तो उसे पहले ही बदल लें। स्कूल खुलने तक का इंतज़ार न करें।
मॉनसून सीजन की तैयारी
मानसून का सीजन शुरू हो चुका है तो ऐसे में कई बार बच्चे स्कूल से आते वक्त गीले हो जाते हैं। बच्चों के लिए एक अतिरिक्त जोड़ी स्कूल के जूतों और कपड़ों की ज़रूर रखें। ताकि अगले दिन बच्चे को गीले जूते पहन कर न जाना पड़े और न ही घर के जूते पहनने की ज़रूरत पड़े।
रूटीन में आना जरूरी
गर्मियों की छुट्टियों में माता पिता से लेकर बच्चों तक का सोने और उठने का समय बदल जाता है। ऐसे में जब स्कूल का पहला दिन आता है तब सुबह सुबह उठना सबके लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है। इससे चुनौती का सामना करने के लिए एक दो दिन पहले से ही जल्दी उठने और समय पर सोने का प्रयास करें।
स्क्रीन टाइम करें कम
छुट्टियों के दौरान हर बच्चे का स्क्रीन टाइम कई गुना बढ़ जाता है जिससे न केवल उनकी आँखों पर असर पड़ता है अपितु उनके ध्यान केंद्रित करने की क्षमता भी कम होती है। इसके कारण बच्चे को स्कूल खुलने के बाद न सिर्फ़ कक्षा में परेशानी होती है बल्कि बच्चा घर में भी सही प्रकार से पढ़ाई नहीं कर पाता है। इसलिए अभी से बच्चे का स्क्रीन टाइम कम करें तथा उसे रोज़ दो से तीन घंटे पढ़ने की आदत डालें।
स्कूल का पहला दिन भी है जरूरी
कई बार स्कूल का पहला दिन कई अभिभावकों और विद्यार्थियों को अनावश्यक सा प्रतीत होता है जिसके कारण वे पहले दिन ही अवकाश ले लेते हैं। ऐसा बिलकुल न करें। विद्यालय का पहला दिन नई ऊर्जा से भरा होता है तथा कई प्रकार के ज़रूरी निर्देश भी दिए जाते हैं। कई बार जब बच्चा अवकाश लेता है तो वह अपने आप को अलग सा महसूस करता है। तो ऐसे में पहले दिन अपने आलस के कारण छुट्टी न करें।
उपरोक्त बिंदुओं का पालन करने से निश्चित ही विद्यार्थी एवं उसके अभिभावकों को कम से कम परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।



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