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खगोलीय घटनाएं हमेशा से ही आम लोगों की दिलचस्पी का कारण बनती हैं। देश के दक्षिण भारत राज्य कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में भी आज एक अनोखी खगोलीय घटना होने वाली है।
आपने लोगों को ये कहते तो सुना होगा कि एक परछाई ही है जो हमेशा इंसान का साथ देती है। मगर आज जो खगोलीय घटना होने वाली है वो इन लाइनों को भी कुछ देर के लिए झुठला देंगी।

कब और कहां होगी जीरो शैडो डे की घटना?
बेंगलुरु में जीरो शैडो डे की घटना 25 अप्रैल 2023 यानी आज दोपहर में होगी। यह घटना भारतीय समय के अनुसार 12 बजकर 17 मिनट पर घटित होगी।
जीरो शैडो डे क्या होता है?
एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (ASI) के अनुसार, जीरो शैडो डे उस दिन को कहते है जिस दिन सूर्य आपके सिर के बिल्कुल ऊपर होगा लेकिन उसकी वजह से आपकी छाया नहीं आएगी। ऐसी स्थिति में सिर्फ इंसान ही नहीं बल्कि चीजों की भी परछाई नहीं बनती है। जानकारी के अनुसार, वास्तविक घटना केवल एक सेकंड के एक अंश तक रहती है, लेकिन इसका असर करीब डेढ़ मिनट तक रहता है।
किन जगहों पर पहले भी हो चुकी है जीरो शैडो डे की घटना?
जीरो शैडो डे की यह अद्भुत घटना ओडिशा के भुवनेश्वर में 2021 में अनुभव की जा चुकी है। इसके अलावा 21 जून 2022 में दोपहर 12 बजकर 28 मिनट पर उज्जैन में भी जीरो शैडो डे की घटना का अनुभव किया जा चुका है। 25 अप्रैल 2023 को बेंगलुरु में होने वाली इन रोमांचक घटना के लिए कोरमंगला में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स द्वारा विशेष इंतजाम किये गए हैं।
क्यों होती है जीरो शैडो की घटना?
धरती का घूर्णन अक्ष सूर्य की तरफ लगभग 23.5 डिग्री पर झुका हुआ है। इस के प्रभाव से मौसम बनते और बदलते हैं। इसका अर्थ है कि सूरज, दिन के अपने उच्चतम पॉइंट पर, भूमध्य रेखा के 23.5 डिग्री दक्षिण से भूमध्य रेखा (उत्तरायण) के 23.5 डिग्री उत्तर की तरफ जाएगा, और फिर से एक साल में (दक्षिणायन) लौट आएगा। इसी घूर्णन प्रक्रिया के चलते, एक जीरो शैडो डे तब आता है, जब सूर्य उत्तर की तरफ बढ़ता है, और दूसरा तब आता है, जब सूर्य दक्षिण की तरफ जाता है। इस तरह से साल में दो बार जीरो शैडो डे पड़ते हैं।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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