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दिल्ली में सांस लेना मुश्किल! UPSC में 8वीं रैंक लाने वाली अधिकारी ने छोड़ी नौकरी, सोशल मीडिया पर मचा बवाल
राजधानी दिल्ली इस समय भयंकर प्रदूषण की चपेट में है। हवा की गुणवत्ता इतनी बिगड़ चुकी है कि लोग अब इसे सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि खतरा मानने लगे हैं। इसी बीच सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर नई बहस छिड़ गई है। एक्स (Twitter) पर अक्षत श्रीवास्तव नाम के एक यूजर ने दावा किया कि उनकी पत्नी आयुषी चंद, जो भारतीय आर्थिक सेवा (Indian Economic Service) से जुड़ी अधिकारी हैं, उन्होंने दिल्ली की प्रदूषित हवा से तंग आकर अपनी सरकारी नौकरी से इस्तीफा दे दिया है। उनका यह पोस्ट देखते ही देखते वायरल हो गया और चर्चा तेज हो गई।

आयुषी चंद के पति ने सोशल मीडिया पर लिखा पोस्ट
एक्स यूजर अक्षत ने दावा किया है कि उनकी पत्नी आयुषी चंद ने यूपीएससी इंडियन इकोनॉमिक सर्विस (IES) 2016 बैच में 8वीं रैंक हासिल की थी और बतौर ग्रुप-A अधिकारी काम कर रही थीं। उन्होंने दिल्ली के प्रदूषण से तंग आकर अपनी नौकरी छोड़ दी है। उन्हाेंने अपनी पोस्ट में लिखा, " मेरी पत्नी ने UPSC- IES परीक्षा में 8वीं रैंक हासिल की थी। वह ग्रुप ए सर्विस की अधिकारी थीं। वह अपने करियर के ज्यादातर हिस्से में दिल्ली में ही रहती थी। लेकिन दिल्ली के प्रदूषण को देखते हुए और हमारे छोटे बेटे के स्वास्थ्य के लिए उन्होंने नौकरी छोड़ दी।' उन्होंने आगे लिखा, 'क्या यह मुश्किल था? हां। ( ग्रुप-A की सरकारी नौकरी कौन छोड़ता है?) क्या हमें इसके लिए पछतावा है? बिल्कुल, नहीं।'
सरकार को ठहराया जिम्मेदार
उन्होंने सरकार पर हमलावर होते हुए आगे लिखा, 'सच तो यह है कि किसी भी सरकार को इसकी परवाह नहीं है। नागरिक भी बड़े पैमाने पर ब्रेनवॉश किए गए हैं। आखिर में जिम्मेदारी आपकी अपनी होती है। कुछ लोगों के लिए यह यूपीएससी की नौकरी छोड़ना होगा। कुछ लोगों के लिए प्राइवेट नौकरी छोड़ना होगा या कुछ लोगों के लिए अपना बिजनेस छोड़ना होगा। बात यह है कि अगर आप अपनी हेल्थ बचाना चाहते हैं, तो आपको इसके लिए कुछ करना होगा। राजनीतिक बहस छोड़िए, अपनी जिंदगी बचाइए।'
पोस्ट में कितनी सच्चाई?
यह महिला अधिकारी कौन हैं और इस पोस्ट में कितनी सच्चाई है, अभी इस बात की पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन इस पोस्ट ने सोशल मीडिया पर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। कई लोग इस फैसले को बहादुरी भरा और दूरदर्शी बताते दिखे, जबकि कुछ का मानना है कि सिस्टम के भीतर रहकर बदलाव लाना बेहतर होता।
प्रदूषण अब 'सीजन प्रॉब्लम' नहीं रहा
विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली का प्रदूषण अब सिर्फ 'सीजनल प्रॉब्लम' नहीं रहा, बल्कि एक स्थायी खतरा बन चुका है। हर साल सर्दियों में हवा जहरीली हो जाती है और सांस लेना मुश्किल होता जाता है। अब यह केवल आम लोगों की समस्या नहीं, बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों तक को शहर छोड़ने पर मजबूर कर रही है।



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