Latest Updates
-
चेहरे पर पड़े चेचक के दाग हटाने के 5 घरेलू उपाय, जिद्दी गड्ढों और माता के निशान से पाएं छुटकारा -
क्यों मनाया जाता है World Rat Day? सबसे पहले किस देश में पैदा हुए चूहे, कैसे पूरी दुनिया में पहुंचे? -
International Carrot Day 2026: 4 अप्रैल को ही क्यों मनाया जाता है विश्व गाजर दिवस? जानें रोचक कहानी -
Bridal Blouse Designs: लेटेस्ट ब्राइडल ब्लाउज बैक डिजाइन, डोरी से लेकर हैवी एम्ब्रॉयडरी तक, देखें 7 पैटर्न्स -
कंडोम की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं? जानें ईरान-इजरायल युद्ध का असर और कपल्स के लिए सेफ्टी टिप्स -
Musibat ki Dua: दुख, तंगी और गम से निजात की इस्लामी दुआएं, इनके जरिए होती है अल्लाह से सीधी फरियाद -
कहीं आप प्लास्टिक राइस तो नहीं खा रहे आप? इन 5 आसान तरीकों से करें असली-नकली की पहचान -
Good Friday 2026: 'सब पूरा हुआ'... इन खास संदेशों और कोट्स के साथ अपनों को भेजें गुड फ्राइडे की शुभकामनाएं -
Aaj Ka Rashifal 3 April 2026: आज इन 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, जानें अपनी राशि का हाल -
गुड फ्राइडे पर घर पर बनाएं रुई जैसे सॉफ्ट 'हॉट क्रॉस बन्स', यहां देखें सबसे आसान रेसिपी
World Vada Pav Day 2022 : मुंबई के लोगों के लिए स्ट्रीट फूड नहीं बल्कि एक अहसास है 'वड़ा पाव'
मुंबई बॉलीवुड के लिए प्रसिद्ध है, भारत की व्यापारिक राजधानी भी है, लेकिन मुंबई अपनी एक और खासियत के लिए वर्ल्ड फेमस है और वो है वड़ा पाव। वड़ा पाव सिर्फ एक स्ट्रीट फूड नहीं है बल्कि एक अहसास है, उनके लिए जो मुंबई में रहते हैं और जिन्होंने कभी ना कभी वड़ा पाव का आनंद लिया है। मुंबई की कहानी इस सिग्नेचर डिश वड़ा पाव के बिना अधूरी है। मुंबई में वड़ा पाव ताजा और 24 घंटे मिलता रहता है। मशहूर हस्तियों ने वड़ा पाव को अपने बेस्ट फास्ट फूड के रूप में प्रचारित किया है। हालांकि, वड़ा-पाव का इतिहास के बारें में लोग नहीं जानते हैं। लेकिन ये मुंबई में हर हाउस होल्ड के साथ स्ट्रीट फूड के तौर पर काफी पसंद के साथ खाया जाता है।
23 अगस्त को वर्ल्ड वड़ा पाव डे मनाया जाता है। वड़ा पाव को जिसे बटाटा वड़ा के नाम से भी जाना जाता है। ये मुंबईकरों के लिए किफायती स्ट्रीट फूड है जो सभी वर्ग के लोगों का फेवरेट है। यह पूरे भारत में फूड स्टॉल और रेस्टेरेंस्ट में भी सर्व किया जाता है। क्रिकेट के भगवान यानि कि सचिन तेंदुलकर को वड़ा पाव बेहद पसंद है। उन्होंने बताया था कि वे शिवाजी पार्क-दादर में इसे कैसे खाते थे, जहां उन्हें क्रिकेट की शिक्षा मिली थी।

वड़ा पाव का इतिहास:
इसे बालासाहेब ठाकरे के साथ शुरू किया था। वड़ा-पाव, महाराष्ट्र के सबसे मनपंसद फूट के तौर पर सामने आया। ये सब 1960 के दशक में शुरू हुआ जब शिवसेना नेता बालासाहेब ठाकरे मराठी मानुस को खुद के मालिक बनने के लिए प्रोत्साहित कर रहे थे। बाला साहेब उस समय हिंदुस्तान साइकिल में काम कर रहे थे। इसके बाद उन्होंने अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने का फैसला किया। उन्होंने एक ऐसा व्यवसाय शुरू किया जो गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों, विशेष रूप से मिल श्रमिकों को अच्छा और पौष्टिक भोजन खिलाना था। वहीं से वड़ा-पाव तैयार करने का ख्याल आया। ये एक ऐसा प्रयोग था जो रातोंरात सफल हो गया। उस समय पाव के बीच सूखी लहसुन की चटनी या नारियल लहसुन की चटनी जैसी चटनी नहीं डाली जाती थी, जिसका आज यूज हो रहा है।
वहीं अशोक वैद्य को इसको प्रणेता माना जाता है। 1966 में दादर रेलवे स्टेशन के बाहर पहला वड़ा पाव स्टाल शुरू करने का श्रेय इनको दिया जाता है। रेलवे स्टेशन के बाहर अधिक बिकने के कारण इसकी लोकप्रियता बढ़ी और ये फूड मुंबई के अंदर फेमस हो गया अशोक वैद्य के निधन के बाद उनके बेटे नरेंद्र ने दादर स्टेशन के बाहर वड़ा पाव बेचने की विरासत संभाली।

वड़ा पाव के बारे में :
वड़ा कार्बोहाइड्रेट से भरपूर आलू की पैटी होती है, जिसमें मैश किये आलू को धनिया, हरी मिर्च और दूसरे मसालों के साथ मिलाकर बनाया जाता है और छोले के घोल में भिगोया जाता है। गरम तेल में तल कर कई तरह की गीली या सूखी चटनी के साथ परोसा जाता है। आपको बता दें कि वड़ा को पेटेंट नहीं किया गया है और ये मुंबई की सड़कों के हर कोने पर आपको मिल जाता है। इसे ज्यादातर पाव (ब्रेड) के साथ खाया जाता है। फोर्ट-फ्लोरा फाउंटेन एरिया के ऑफिस जाने वालों में, प्रसिद्ध स्थानों में से एक, सेंट्रल टेलीग्राफ कार्यालय के पास स्थित सीटीओ के पास वड़ा पाव फेमस है। मुंबई के मैदानी इलाकों में कई स्टॉल हैं- शिवाजी पार्क, ओवल, आजाद, क्रॉस मैदान के पास बिकने वाले वड़ा पाव का स्वाद लाजवाब होता है।

वड़ा पाव की कीमत :
स्ट्रीट स्टॉल और फास्ट फूड जॉइंट्स में कीमत 10 रुपये से 20 रुपये के बीच है। मुंबई के लोग इसे पसंद करते हैं और अब यह भारत के अधिकांश महत्वपूर्ण शहरों में फैल गया है। वड़ा पाव यूएस और यूके और जहां भी मुंबईकर रहते हैं वहां आपको ये मिल ही जाएगा। खासकर युवाओं के बीच, अब, समोसा-पाव, भजिया-पाव, उसल-पाव, मिसल-पाव, वैरिएंट हैं जो समान रूप से लोकप्रिय हैं,

मैकडॉनल्ड्स नहीं कर सका वड़ा पाव को बीट
जब 1990 के दशक में भारत में अमेरिकी फास्ट-फूड चेन मैकडॉनल्ड्स अपनी फूड चेन लेकर आया और इसको तेजी के साथ भारत के दूसरे हिस्सों में फैलाने लगा तब भी वड़ा पाव का क्रेज ये कम नहीं कर सका। वड़ा पाव का हर विक्रेता अपने मसाले यूज करता है..बनाने का तरीका भी उनका अपना होता है, जो उनके वड़ा पाव को अलग बनाते हैं। भारत जैसे देश में, जहां बहुत सारी संस्कृतियां और खाना बनाने और खाने के तरीके अलग हैं, इसलिए यहां पर कितने भी विदेशी ब्रांड आ जाएं लेकिन भारत के लोग अपने देश के खानपान को उन पर ज्यादा तरजीह नहीं देते हैं, जैसे की मुंबई के लोग वड़ा पाव के सामने किसी भी स्ट्रीट फूड और विदेशी ब्रांड पूड चेन को अपनी लिस्ट से नीचे ही रखते है।

स्वास्थ्य के नजरीये से भी वड़ा पाव है बेहतर
भारत की प्रमुख हेल्थ और एक्सरसाइज साइंस एक्सपर्ट रुजुता दिवेकर के अनुसार, स्वास्थ्य के नजरीये से भी वड़ा पाव अच्छा होता है क्योंकि उसमें दालें मिलाई जाती है, दालों में प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है, जिस वजह से आप इस स्ट्रीट फूड को खाने के बाद ये नहीं कह सकते कि ये अनहेल्दी है।



Click it and Unblock the Notifications











