Latest Updates
-
चेहरे पर पड़े चेचक के दाग हटाने के 5 घरेलू उपाय, जिद्दी गड्ढों और माता के निशान से पाएं छुटकारा -
क्यों मनाया जाता है World Rat Day? सबसे पहले किस देश में पैदा हुए चूहे, कैसे पूरी दुनिया में पहुंचे? -
International Carrot Day 2026: 4 अप्रैल को ही क्यों मनाया जाता है विश्व गाजर दिवस? जानें रोचक कहानी -
Bridal Blouse Designs: लेटेस्ट ब्राइडल ब्लाउज बैक डिजाइन, डोरी से लेकर हैवी एम्ब्रॉयडरी तक, देखें 7 पैटर्न्स -
कंडोम की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं? जानें ईरान-इजरायल युद्ध का असर और कपल्स के लिए सेफ्टी टिप्स -
Musibat ki Dua: दुख, तंगी और गम से निजात की इस्लामी दुआएं, इनके जरिए होती है अल्लाह से सीधी फरियाद -
कहीं आप प्लास्टिक राइस तो नहीं खा रहे आप? इन 5 आसान तरीकों से करें असली-नकली की पहचान -
Good Friday 2026: 'सब पूरा हुआ'... इन खास संदेशों और कोट्स के साथ अपनों को भेजें गुड फ्राइडे की शुभकामनाएं -
Aaj Ka Rashifal 3 April 2026: आज इन 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, जानें अपनी राशि का हाल -
गुड फ्राइडे पर घर पर बनाएं रुई जैसे सॉफ्ट 'हॉट क्रॉस बन्स', यहां देखें सबसे आसान रेसिपी
दिल्ली के 1600 साल पुराने लौह स्तंभ पर आज तक नहीं लगी जंग, जानें इससे जुड़ा रहस्य
देश की राजधानी दिल्ली को घूमने की बेहतरीन जगहों में से एक माना जाता है। यहां पर ऐसी कई ऐतिहासिक जगहें हैं, जो देश-विदेश से पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। इन्हीं में से एक है कुतुब मीनार, जिसे दुनिया की सबसे ऊंची मीनार के रूप में जाना जाता है।
आपने भी कुतुब मीनार को अवश्य देखा होगा। लेकिन आपने कुतुब परिसर में खड़े एक विशाल लौह स्तंभ को कभी देखा है? यह लौह स्तंभ स्वयं में बेहद ही अनूठा है, क्योंकि इसके रहस्य के बारे में लोग आज भी जानना चाहते हैं।
ऐसी मान्यता है कि यह लौह स्तंभ 1600 सालों से भी अधिक पुराना है, लेकिन आज तक इस पर जंग नहीं लगा। लोहे से बने इस स्तंभ पर धूप से लेकर बारिश तक किसी भी चीज का असर नहीं हुआ। ऐसे में वैज्ञानिक और पुरातत्ववेत्ता यह जानने को लेकर उत्सुक रहते हैं कि आखिरकार इस लौह स्तंभ को बनाते समय ऐसी कौन सी तकनीक का इस्तेमाल किया गया कि आज तक इस पर जंग नहीं लगी।

तो चलिए आज इस लेख में हम आपको इस बेहद ही अनोखे जंग मुक्त लौह स्तंभ के बारे में बता रहे हैं-
चंद्रगुप्त द्वितीय ने बनवाया था स्तंभ
दिल्ली के कुतुब परिसर में मौजूद लौह स्तंभ का अपना एक अलग ऐतिहासिक महत्व भी है। इसका निर्माण चंद्रगुप्त द्वितीय ने अपने शासनकाल के दौरान करवाया था। उनका शासनकाल लगभग 375-415 ई. तक था। आज यह लौह स्तंभ दिल्ली में महरौली के कुतुब परिसर में स्थित है। लेकिन ऐसी मान्यता है कि इसे कहीं और, शायद उदयगिरि गुफाओं के बाहर बनाया गया था। बाद में, 11वीं शताब्दी में अनंगपाल तोमर द्वारा इसे अपने वर्तमान स्थान पर ले जाया गया था।
लौह स्तंभ की संरचना
यह जंग मुक्त लौह स्तंभ 7.21 मीटर अर्थात् 23 फीट 8 इंच ऊंचा है, जिसमें से 1.12 मीटर (3 फीट 8 इंच) जमीन के नीचे है। इसका व्यास 41 सेंटीमीटर है और इसकी घंटी पैटर्न की चोटी 306 मिमी है। स्तंभ का वजन छह टन से अधिक है।
इसलिए नहीं लगता जंग
यह लौह स्तंभ बेहद ही पुराना है और उस समय तकनीक का विकास नहीं हुआ था। ऐसे में इस लौह स्तंभ पर जंग ना लगना प्राचीन भारत के धातुकर्मियों के कौशल को साफतौर पर दर्शाता है। साल 2003 तक उत्तरी शहर कानपुर में आईआईटी के विशेषज्ञों ने इस रहस्य को सुलझाया। उन्होंने पाया कि लोहे से बने इस स्तंभ में फॉस्फोरस की मात्रा अधिक (लगभग 1 प्रतिशत) है और इसमें सल्फर और मैग्नीशियम की कमी है। इतना ही नहीं, स्तंभ की सतह पर लोहे, ऑक्सीजन और हाइड्रोजन के यौगिक "मिसावाइट" की एक पतली परत का इस्तेमाल भी किया गया। जिससे इस पर बाहरी वातावरण का कोई असर नहीं पड़ता है।



Click it and Unblock the Notifications











