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Gangaur Ke Geet: 'आ टीकी बहू गोराँ ने सोवै'...इन मधुर गीतों के बिना अधूरी है गौरा पूजा, यहां पढ़ें पूरे लिरिक्स
Gangaur Ke Geet Lyrics In Hindi: राजस्थान की रेतीली धोरों वाली धरती पर जब चैत्र का महीना दस्तक देता है, तो फिजाओं में लोकगीतों की मिश्री घुलने लगती है। होली के अगले दिन से शुरू होने वाला गणगौर का 16 दिवसीय उत्सव केवल एक व्रत नहीं, बल्कि सखियों के मिलन, हंसी-ठिठोली और ईसर-गौरा के प्रति अगाध श्रद्धा का महापर्व है। मारवाड़ से लेकर मालवा तक, गलियां 'गवरजा' के गीतों से गूंज उठती हैं। मान्यता है कि इन 16 दिनों में माता पार्वती (गौरी) अपने पीहर आती हैं, जहां कुंवारी कन्याएं और सुहागिनें गीत गाकर उनकी सेवा करती हैं।
गणगौर की पूजा में श्रृंगार से लेकर माता को पानी पिलाने और विदाई तक, हर रस्म के लिए एक विशेष लोकगीत बना है। कहा जाता है कि इन गीतों के बिना गणगौर की पूजा अधूरी रहती है, क्योंकि ये स्वर ही अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य का वरदान लाते हैं। आइए, इस पावन अवसर पर हम भी इन 5 प्रसिद्ध मारवाड़ी गीतों के जरिए माता गौरजा और ईसर जी को प्रसन्न करें।

1. गौर ए गणगौर माता खोल ए किवाड़ी (स्वागत गीत)
यह गीत पूजा की शुरुआत में गाया जाता है, जिसमें सखियाँ माता से द्वार खोलने की विनती करती हैं।
लिरिक्स:
गौर ए गणगौर माता, खोल ए किवाड़ी,
बाहर उभी थारी पूजन वाली।
पूजो ए पूजवो सईयां, काय फल मांगो,
मांगो ए म्हे अन्न धन, लाछर लक्ष्मी।
मांगो ए म्हे पीला पोमचा, सासरियो सुख,
मांगो ए म्हे वीर बीरो, अमर सुहाग।
म्हारा ए ईसर जी रा बागां में, फूल खिले ए,
म्हे तो ए गवरी माता, थारे शरणां आयां।
गौर ए गणगौर माता, खोल ए किवाड़ी...
2. गोर गोर गोमती (मुख्य पूजन गीत)
यह गणगौर का सबसे महत्वपूर्ण मंत्रनुमा गीत है। इसे दूब (घास) से पानी छिड़कते समय अनिवार्य रूप से गाया जाता है।
लिरिक्स:
गोर गोर गोमती, ईसर पूजे पार्वती।
पार्वती का आला-गीला, गौर का सोना का टीका।
टीका दे, टमका दे, राजा की बेटी राज करे।
साहू की बेटी मान करे, ईसर पूजे पार्वती।
रानी पूजे राज को, म्हे पूज्यां सुहाग को।
राण्यां को राज घटतो जाय, म्हारो सुहाग बढ़तो जाय।
कीड़ी-कीड़ी कीड़ो दे, कीड़ी थारा बीरा दे।
बीरा की बहुड़ल्यां दे, सात पूत और इक धीव दे।
गोर गोर गोमती, ईसर पूजे पार्वती...
3. आ टीकी बहू गोराँ ने सोवै (श्रृंगार गीत)
इस गीत में माता गौरी के गहनों और ईसर जी द्वारा लाए गए उपहारों का वर्णन है।
लिरिक्स:
आ टीकी बहू गोराँ ने सोवै,
ईसर जी लाया मोल, गौरल रा बाया।
टीकी रो घड़ामण सोनो, गौरल रा बाया,
मस्तक सोवै टीकी, नथड़ी सोवै नाक।
बाजूबंद सोवै बांय में, चूड़ो सोवै हाथ,
आ टीकी बहू गोराँ ने सोवै...
सांकल्यां सोवै पग में, बिछिया सोवै आंगल्यां,
पीळो सोवै माथे, चुनर सोवै साथ।
आ टीकी बहू गोराँ ने सोवै...
4. ओ जी म्हारो ईसर दास (ईसर जी का गीत)
यह गीत भगवान शिव (ईसर जी) की महिमा और उनके रमता (खेलता) जोगी स्वरूप के लिए है।
लिरिक्स:
ओ जी म्हारो ईसर दास, बागां में रमता जाय,
बागां में सूं फूल ल्याया, गवरी ने चढ़ावा जाय।
गवरी म्हाने सुहाग दे, ईसर म्हाने धन दे,
चूड़ो म्हारो अमर रहवे, पीहर म्हारो खिलतो रहवे।
सासरिये में मान रहवे, देवर जेठ री लाड रहवे।
ओ जी म्हारो ईसर दास, बागां में रमता जाय,
फूल गुलाब रा हार बणाया, ईसर जी रे गळ पहराया।
ओ जी म्हारो ईसर दास...
5. कानी कानी दूबलिया (दूब पूजन गीत)
दूब (घास) लाते समय और उससे गौर माता की पूजा करते समय यह गीत लयबद्ध तरीके से गाया जाता है।
लिरिक्स:
कानी कानी दूबलिया, कानी कानी दूब,
बाड़ी में सूं खोद ल्याया, गवरी पूजण चाली।
गवरी पूजण चाल्या सईयां, संग में साहेल्यां,
हरी-हरी दूब सूं गौरजा रांवा, सुहाग रा भाग जगावां।
म्हे तो पूजां सुहाग ने, थे दीजो अखंड सुहाग,
कानी कानी दूबलिया, कानी कानी दूब...
गीत गाने के नियम:
इन गीतों को गाते समय हाथ में दूब (घास) और फूल रखने चाहिए।
गणगौर के गीत हमेशा समूह में गाए जाते हैं, जिसे 'गीत बैठाना' भी कहा जाता है।
हर गीत के अंत में "जय गवरी माता की, जय ईसर जी की" बोलना शुभ माना जाता है।



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