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आधी रात को पढ़ी जाने वाली तहज्जुद की नमाज क्या है? कितनी रकात पढ़ने से दुआ होती है कुबूल
Tahajjud Namaz Importance: इस्लाम में नमाज को सबसे बड़ी इबादत माना गया है, लेकिन नमाजों में भी कुछ खास नमाजें ऐसी हैं जो इंसान को अल्लाह के और ज्यादा करीब ले जाती हैं। उन्हीं में से एक है तहज्जुद की नमाज, जिसे रात के सन्नाटे और सुकून भरे वक्त में पढ़ा जाता है। कहा जाता है कि इस नमाज का सवाब दोगुना होता है और इस वक्त की गई दुआ कभी खाली नहीं जाती।
यही वजह है कि अल्लाह के नेक बंदे और नबी खुद भी इस नमाज को खास तवज्जो देते थे। आइए जानते हैं कि क्या होती है तहज्जुद की नमाज और इसे पढ़ने का सही तरीका, समय क्या है। साथ ही ये भी कि तहज्जुद की नमाज पढ़ने से क्या सच में दुआ कुबूल होती है?
तहज्जुद की नमाज क्या है?
तहज्जुद की नमाज एक नफ्ल नमाज है, जो ईशा की नमाज के बाद और फज्र से पहले तक पढ़ी जाती है। यह रात की इबादत है और इसे अल्लाह तआला के सबसे करीब होने का जरिया माना जाता है। इस्लाम धर्म को मानने वालों का कहना है कि आधी रात को पढ़ी जाने वाली तहज्जुद की नमाज का सवाब दोगुना होता है। अल्लाह का बंदा जब आधी रात को नींद को छोड़कर कोई दुआ मांगता है को अल्लाह उस नेक बंदे की दुआ कुबूल करते हैं।

तहज्जुद की नमाज पढ़ने का सही समय क्या है?
बता दें कि तहज्जुद की नमाज की नमाज आधी रात को यानी ईशा की नमाज के बाद से फज्र तक तहज्जुद पढ़ी जा सकती है। इसे पढ़ने का सबसे बेहतर वक्त है आधी रात के बाद जब हर ओर सिर्फ सन्नाटा होता है और लोग गहरी नींद में सो रहे होते हैं। ऐसे में जो बंदा अल्लाह तहज्जुद की नमाज पढ़ता है उसकी सारी दुआ कुबूल की जाती है। अल्लाह को भी लगता है कि आखिर ऐसा कौन सा बंदा है जो अपनी नींद छोड़ मुझे याद कर रहा है।
तहज्जुद की नमाज कितनी रकात होती है?
तहज्जुद की नमाज कम से कम 2 रकात और ज्यादा से ज्यादा 12 रकात तक पढ़ी जा सकती है। नबी अक्सर 8 रकअत तहज्जुद अदा किया करते थे। ऐसे में ये माना जाता है कि जो बंदा 8 रकअत तहज्जुद की नमाज पढ़ता है उसकी दुआ कुबूल की जाती है।
तहज्जुद की नमाज के फायदे और सवाब
अल्लाह तआला बंदे के करीब हो जाते हैं।
इस वक्त की दुआएं जल्दी कबूल होती हैं।
गुनाहों की माफी मिलती है।
दिल को सुकून और चेहरे पर नूर आता है।
दुनिया और आखिरत दोनों में कामयाबी मिलती है।
तहज्जुद की नमाज में दुआएं कबूल क्यों होती हैं?
कुरान और हदीस में भी साफ कहा गया है कि रात के इस वक्त अल्लाह अपने बंदों की दुआओं को ज्यादा तवज्जो देते हैं। इसलिए जो भी बंदा तहज्जुद में रोकर दुआ करता है, उसकी फरियाद जल्दी सुनी जाती है। तहज्जुद की नमाज पढ़ने से बंदे के बिगड़े काम बनते हैं, कारोबार में बरकत आती है और बीमारी से शिफा मिलती है।



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