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Muharram 2021: कब है मुहर्रम, साथ ही जानें इस दिन से जुड़ा इतिहास और महत्व
इस्लामिक कैलेंडर के पहले महीने को मुहर्रम कहा जाता है। इस्लाम धर्म में इस माह को काफी पाक माना गया है। इस माह को गम और दर्द का महीना भी कहा जाता है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार इस्लामिक महीना मुहर्रम 10 अगस्त से शुरू हो चुका है। मुहर्रम महीने का दसवां दिन आशूरा होता है और इसी दिन मुहर्रम भी मनाया जाता है। साल 2021 में मुहर्रम 19 अगस्त को मनाया जाएगा। जानें इस दिन से जुड़ी खास बातें।

मुहर्रम क्यों मनाया जाता है?
इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, पैगंबर मोहम्मद साहब के नवासे थे हजरत इमाम हुसैन। उन्होंने इस्लाम और मानवता को बचाने के लिए कर्बला की जंग में अपने प्राणों की कुर्बानी दे दी। गौरतलब है कि कर्बला की जंग हजरत इमाम हुसैन और बादशाह यजीद की सेना के बीच हुई थी। इस जंग के दसवें दिन इस्लाम की हिफाजत के लिए हजरत इमाम हुसैन ने अपनी जान कुर्बान कर दी थी। इस आशूरा भी कहा जाता है। इस्लाम धर्म के मानने वालों के लिए मुहर्रम का दसवां दिन बहुत मायने रखता है।

मुहर्रम का महत्व
हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में शिया मुसलमान मुहर्रम के दिन ताजिया निकालते हैं। ये ताजिया इमाम हुसैन के साथ मारे गए साथियों की शहीदी का प्रतीक मानी जाती हैं। अकीदतमंद इस ताजिया के साथ जुलूस निकालते हैं और फिर प्रतीकात्मक रूप से इसे दफना दिया जाता है। देश और दुनिया के मुसलमानों के लिए ये गम का महीना है।

हजरत इमाम हुसैन का मकबरा कहां है?
इमाम हुसैन और यजीदी की लडाई कर्बला में हुई थी और ये ईराक में है। हजरत इमाम हुसैन का मकबरा ईराक की राजधानी बगदाद से लगभग 120 किलोमीटर दूर है। मुसलिम समुदाय के लोगों के लिए ये बहुत ही पाक जगह है।

कैसे मनाया जाता है मुहर्रम?
मुहर्रम के महीने में मुसलमान हजरत हुसैन की कुर्बानी को याद करके शोक मनाते हैं। खासतौर से शिया मुसलमान मातम मनाते हैं और साथ ही ताजिया निकालते हैं। इमाम हुसैन के बलिदान को याद करने का सिलसिला मुहर्रम की पहली रात से ही शुरू हो जाता है और ये अगले दो महीने आठ दिन तक चलता है।



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