Latest Updates
-
Aaj Ka Rashifal 4 April 2026: शनिवार को इन 5 राशियों पर होगी धनवर्षा, जानें अपनी राशि का भाग्य -
चेहरे पर पड़े चेचक के दाग हटाने के 5 घरेलू उपाय, जिद्दी गड्ढों और माता के निशान से पाएं छुटकारा -
क्यों मनाया जाता है World Rat Day? सबसे पहले किस देश में पैदा हुए चूहे, कैसे पूरी दुनिया में पहुंचे? -
International Carrot Day 2026: 4 अप्रैल को ही क्यों मनाया जाता है विश्व गाजर दिवस? जानें रोचक कहानी -
Bridal Blouse Designs: लेटेस्ट ब्राइडल ब्लाउज बैक डिजाइन, डोरी से लेकर हैवी एम्ब्रॉयडरी तक, देखें 7 पैटर्न्स -
कंडोम की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं? जानें ईरान-इजरायल युद्ध का असर और कपल्स के लिए सेफ्टी टिप्स -
Musibat ki Dua: दुख, तंगी और गम से निजात की इस्लामी दुआएं, इनके जरिए होती है अल्लाह से सीधी फरियाद -
कहीं आप प्लास्टिक राइस तो नहीं खा रहे आप? इन 5 आसान तरीकों से करें असली-नकली की पहचान -
Good Friday 2026: 'सब पूरा हुआ'... इन खास संदेशों और कोट्स के साथ अपनों को भेजें गुड फ्राइडे की शुभकामनाएं -
Aaj Ka Rashifal 3 April 2026: आज इन 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, जानें अपनी राशि का हाल
सुहागिन महिलाओं का खास पर्व है कजरी तीज, जानें तिथि, मुहूर्त
हर साल भादो माह में कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि का दिन कजरी तीज के रूप में मनाया जाता है। हरियाली तीज की भांति ही कजरी तीज पर भी सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए व्रत करती हैं। कजरी तीज को कजली तीज, सातूड़ी तीज और बूढ़ी तीज के नाम से भी जाना जाता है।

यह पर्व खासतौर से उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और राजस्थान में मनाया जाता है। कजरी तीज विवाहित महिलाओं के लिए ख़ास महत्व रखता है। जानते हैं इस साल कजरी तीज की तिथि और शुभ मुहूर्त क्या है और इस व्रत से किस तरह के लाभ मिलते हैं।

कजरी तीज की तिथि और शुभ मुहूर्त
कजरी तीज तिथि: 6 अगस्त 2020
कजरी तीज 2020 शुभ मुहूर्त
तृतीया तिथि प्रारम्भ: रात 10 बजकर 50 मिनट से (05 अगस्त 2020)
तृतीया तिथि समाप्त: रात 12 बजकर 14 मिनट (07 अगस्त 2020)

कजरी तीज का महत्व
कजरी तीज का व्रत शादीशुदा महिलाएं अपने पति की लंबी आयु की कामनापूर्ति के लिए रखती हैं। माना जाता है कि इस व्रत को करने से वैवाहिक जीवन में आ रही सभी परेशानियां दूर होती हैं। सुहागिन महिलाएं दुल्हन की तरह पूर्ण श्रृंगार करती हैं और भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा करती हैं। यह व्रत करने से उन्हें अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। कजरी तीज का व्रत कुंवारी कन्याएं भी रख सकती हैं। किसी कुंवारी कन्या द्वारा यह व्रत करने से उसे मनचाहे वर की प्राप्ति होती है।

कजरी तीज की पूजा विधि
कजरी तीज का व्रत करने वाली महिलाओं को सुबह जल्दी उठकर स्नानादि करके नए वस्त्र धारण करने चाहिए। अपना पूरा श्रृंगार करें। कजरी तीज के व्रत में पूजा सांयकाल में की जाती है और इसमें नीमड़ी माता को पूजा जाता है।
सांझ में उनकी पूजा से पहले रोली और जल के छींटे मारकर माता का आह्वाहन करें। अब उन्हें चावल चढ़ाएं। नीमड़ी माता के पीछे दीवार पर मेहंदी, काजल और रोली से 13-13 बिंदियां अपनी उंगली से लगाएं। ध्यान रहे कि आप मेंहदी तथा रोली की बिंदी दाएं हाथ की अनामिका उंगली से लगाएं और काजल की बिंदी तर्जनी उंगली से लगाएं।
अब निमड़ी माता को पूर्ण श्रद्धा के साथ मोली, मेहंदी, काजल तथा वस्त्र चढ़ाएं। साथ ही उन्हें कोई फल और दक्षिणा भी अर्पित करें। पूजा के कलश में रोली बांध दें।
इसके बाद पूजा स्थल के पास तालाब के किनारे पर दिया जलाएं। अब इस दीपक की रौशनी में आप नींबू, ककड़ी, नीम की टहनी, नाक की नथ और साड़ी का पल्ला देखें। इसके बाद चन्द्रमा को अर्घ्य दे दें।



Click it and Unblock the Notifications











