Latest Updates
-
Aaj Ka Rashifal 4 April 2026: शनिवार को इन 5 राशियों पर होगी धनवर्षा, जानें अपनी राशि का भाग्य -
चेहरे पर पड़े चेचक के दाग हटाने के 5 घरेलू उपाय, जिद्दी गड्ढों और माता के निशान से पाएं छुटकारा -
क्यों मनाया जाता है World Rat Day? सबसे पहले किस देश में पैदा हुए चूहे, कैसे पूरी दुनिया में पहुंचे? -
International Carrot Day 2026: 4 अप्रैल को ही क्यों मनाया जाता है विश्व गाजर दिवस? जानें रोचक कहानी -
Bridal Blouse Designs: लेटेस्ट ब्राइडल ब्लाउज बैक डिजाइन, डोरी से लेकर हैवी एम्ब्रॉयडरी तक, देखें 7 पैटर्न्स -
कंडोम की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं? जानें ईरान-इजरायल युद्ध का असर और कपल्स के लिए सेफ्टी टिप्स -
Musibat ki Dua: दुख, तंगी और गम से निजात की इस्लामी दुआएं, इनके जरिए होती है अल्लाह से सीधी फरियाद -
कहीं आप प्लास्टिक राइस तो नहीं खा रहे आप? इन 5 आसान तरीकों से करें असली-नकली की पहचान -
Good Friday 2026: 'सब पूरा हुआ'... इन खास संदेशों और कोट्स के साथ अपनों को भेजें गुड फ्राइडे की शुभकामनाएं -
Aaj Ka Rashifal 3 April 2026: आज इन 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, जानें अपनी राशि का हाल
Eid-ul-Azha: क्यों मनाई जाती है बकरीद? किसकी याद में दी जाती है कुर्बानी, जानें इसकी अहमियत
ईद-उल-अज़हा यानि की बकरीद इस्लामिक कैलेंडर के 12वें महीने जिल हिज्जाह की 8वीं तारीख से 12वीं तारीख ये हज का टाइम होता है, इसके 12वीं तारीख को ईद-उल-अज़हा सेलिब्रेट किया जाता है। इस दिन ही 40 दिनों को हज हाजियों के द्वारा पूरा किया जाता है। ईद-उल-अज़हा के दिन भेड़ या बकरा की कुर्बानी दी जाती है। भैंस और ऊंट की भी कुर्बानी दी जाती है। इस कुर्बानी के पीछे अल्लाह पाक की राह में अपने मन्नतों से पाए बेटे इस्माइल को कुर्बानी हजरत इब्राहीम (AS) देने जा रहे थे। ये कुर्बानी उनकी अल्लाह पाक की रजा और अल्लाह पाक पर यकीन को मजबूत करने के लिए कुर्बानी जाती है। आइये जानते हैं कि ईद-उल-अज़हा के दिन पूरी दुनिया के मुसलमान भेड़ या बकरा की कुर्बानी क्यों देते हैं-

इस्लाम के मुताबकि पैगंबर हज़रत इब्राहीम अल्लाह पाक के नबी थे। अल्लाह ने इनको अपना मैसेंजर बनाकर दुनिया में भेजा था। पैगंबर हज़रत इब्राहीम को अल्लाह ने ख़्वाब में अपनी सबसे प्यारी चीज को कुर्बान करने का हुक्म दिया। उस वक्त उनकी सबसे अजीज चीज जो थी वो उनके बेटे हजरत इस्माइल थे, जो बहुत दुआओं के बाद पैगंबर हज़रत इब्राहीम की 80 साल की उम्र में पैदा हुए थे। इस बात जिक्र कुरआन की आयतों में हैं। कुरआन की सूरह साफ्फात में इसके बारें में बताया गया है।
हज़रत इब्राहीम से अल्लाह उनकी सबसे प्यारी चीज की कुर्बानी के ज़रिए उनके अल्लाह पर यकीन और सब्र को देखना चाहते थे। हज़रत इब्राहीम को ही अपने बेटे के गर्दन पर छूरी चलानी थी, जो दुनिया का सबसे कठिन और तकलीफ देने वाला काम है।
हज़रत इब्राहीम ने अपनी आंखों पर पट्टी बांध ली और हजरत इस्माइल की गर्दन पर उन्होने छुरी को चला दिया लेकिन अल्लाह के हुक्म से फ़रिश्ते को भेजा, उसने हजरत इस्माइल को उठाकर वहां एक दुंबा ( एक भेड़ की नस्स) रख दिया। हजरत इस्माइल को अल्लाह के हुक्म से बचा लिया गया और दुंबा की कुर्बानी हो गई।
इसके बाद से ही पूरी दुनिया के मुसलमान बकरे की कुर्बानी हज के आखिरी दिन यानि ईद-उल-अज़हा के दिन करते हैं।
हज के दौरान शैतान को पत्थर मारना
हज के दौरान शैतान को पत्थर मारने की भी रस्म होती हैं जो हज़रत इब्राहीम से जुड़ी हुई है। जब हज़रत इब्राहीम अपने बेटे हजरत इस्माइल की कुर्बानी देने जा रहे थे, तो उस वक्त उनको रास्ते में एक आदमी मिलती है जो शैतान था, शैतान ने हजरत इब्राहीम को 3 जगहों पर बहकाने की कोशिश की थी। तीन पिलर्स जिस पर कंकड़ी मारी जाती है वो स्थान है जहां पर शैतान ने बहकाने की भरपूर कोशिश की थी, लेकिन हजरत इब्राहीम उसकी बातों में नहीं आए। शैतान ने हज़रत इब्राहीम को ये कहकर बहकाने की कोशिश की कि तुम अपने इकलौते बेटे की क्यों कुर्बानी देने जा रहे हो वो तुम्हारा सहारा है। लेकिन हजरत इब्राहीम ने उसकी नहीं सुनीं। इसी बहकावे के कारण मुसलमान आज भी हज यात्रा के दौरान शैतान को पत्थर मारते हैं।



Click it and Unblock the Notifications











