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Barish ki Dua: जब बारिश न हो रही हो तब ऐसे करें फरियाद, जानें महत्व और तरीका
Barish ki Dua: गर्मी की तपिश और सूखे मौसम में जब बादलों का नामोनिशान तक न हो, तब इंसान की निगाहें ऊपर आसमान की ओर उठ जाती हैं। ऐसे हालात में इस्लाम में बारिश के लिए दुआ मांगने की खास अहमियत बताई गई है। बारिश के लिए की गई दुआ ना सिर्फ अल्लाह से जुड़ने का जरिया है, बल्कि यह प्राकृतिक संकट में राहत की उम्मीद भी होती है।
इन दिनों बारिश की सबसे ज्यादा जरूरत है क्योंकि गर्मी चरम पर है। ऐसे में हम आपको बताने जा रहे हैं कि इस्लाम में कैसे की जाती है बारिश की दुआ और इसका महत्व व दुआ करने का तरीका।

जब बारिश न हो रही हो तब पढ़ी जाती है ये दुआ
اللَّهُمَّ اسْقِنَا غَيْثًا مُغِيثًا، مَرِيئًا، مَرِيعًا، نَافِعًا غَيْرَ ضَارٍّ، عَاجِلًا غَيْرَ آجِلٍ
बारिश की दुआ का इंग्लिश ट्रांसलेशन
Allahumma Asqina Ghaithan Mugheethan, Maree'an, Maree'a, Naafi'an Ghaira Dhaar, Aajilan Ghaira Aajil
बारिश की दुआ का हिंदी अर्थ?
आपने बारिश की दुआ तो देख ली कैसी होती है। अब इसका हिंदी अर्थ भी जान लेते हैं। दरअसल उर्दू में पढ़ी जाने वाली बारिश की दुआ का हिंदी अर्थ होता है-
"हे अल्लाह! हमें लाभदायक, ताजगी देने वाली, हानि से रहित और तुरंत आने वाली बारिश अता फरमा।"

बारिश के समय पढ़ी जाने वाली दुआ
اللَّهُمَّ صَيِّبًا نَافِعًا
इंग्लिश ट्रांसलेशन
Allahumma Sayyiban Naafi'an
दुआ का हिंदी अर्थ-
"हे अल्लाह! इसे लाभदायक बारिश बना दे।"
क्या है बारिश की दुआ का महत्व?
सुन्नत से साबित: पैगंबर मुहम्मद ने कठिन समय में बारिश की दुआ की है।
रहमत की निशानी: बारिश को कुरान और हदीस में रहमत कहा गया है।
सामूहिक प्रार्थना: इस्तिस्का नमाज (Salat-ul-Istisqa) विशेष रूप से बारिश की मांग के लिए पढ़ी जाती है।
तौबा और इस्तिगफार: गुनाहों की माफी मांगना बारिश के लिए की जाने वाली दुआ का अहम हिस्सा है।

बारिश की मांग के लिए नमाज-ए-इस्तिस्का
अगर लंबे समय तक बारिश नहीं होती, तो मुसलमान सामूहिक रूप से "नमाज़-ए-इस्तिस्का" अदा करते हैं। यह एक विशेष नमाज़ होती है जिसमें सभी लोग अल्लाह से बारिश की फरियाद करते हैं।

कब और कैसे करें दुआ?
साफ दिल और सच्ची नियत से दुआ करें
सामूहिक रूप से मस्जिद या मैदान में जाकर नमाज़ पढ़ें
गुनाहों से तौबा करें और नेक अमल करें
दुआ करते वक्त हाथ उठाएं और दिल से फरियाद करें



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