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युवाओं में क्यों बढ़ रहे हैं आत्महत्या के केस? जानें उनकी मनोदशा और कैसे कर सकते हैं रोकथाम
World Suicide Prevention Day: आज की तेज रफ्तार जिंदगी में युवाओं पर सबसे ज्यादा दबाव देखा जाता है। बचपन से लेकर जवानी तक कभी पढ़ाई का प्रेशर तो कभी अच्छे नंबर लाने का प्रेशर। बड़े होते हैं तो करियर का प्रेशर और रिश्तों व सामाजिक अपेक्षाओं का प्रेशर। कभी-कभी तो ऐसा लगता है कि युवा प्रेशर कुकर बन गया है। ऐसे माहौल में कई बार मानसिक तनाव, अवसाद और अकेलापन इतना गहरा हो जाता है कि युवा आत्महत्या जैसे कठोर कदम के बारे में सोचने लगते हैं।
हर साल 10 सितंबर को "वर्ल्ड सुसाइड प्रिवेंशन डे" (World Suicide Prevention Day) मनाया जाता है ताकि दुनिया को यह याद दिलाया जा सके कि आत्महत्या कोई समाधान नहीं, बल्कि एक बड़ी सामाजिक और मानसिक स्वास्थ्य चुनौती है। आज हम इस दिन को मनाने का उद्देश्य जानते हैं, ये भी जानते हैं कि युवाओं के मन में ऐसे विचार क्यों आते हैं और इसके रोकथाम के तरीके क्या हैं?
क्यों मनाया जाता है "वर्ल्ड सुसाइड प्रिवेंशन डे"?
"वर्ल्ड सुसाइड प्रिवेंशन डे (World Suicide Prevention Day)" हर साल 10 सितंबर को मनाया जाता है। इसे मनाने का उद्देश्य आत्महत्या जैसी गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्या के बारे में जागरूकता फैलाना और आत्महत्या की रोकथाम के लिए लोगों को प्रेरित करना है। लोगों को ये समझने की जरूरत है कि सुसाइड करना किसी बात का समाधान नहीं है। हर किसी के लिए ये सोचने की जरूरत है कि किसी भी गलत कदम को उठाने से पहले ये समझें कि आपके पीछे आपको प्यार करने वाले हैं जो आपके जाने के बाद टूट जाएगा। ऐसे में आत्महत्या जैसे कदम को उठाने से पहले ये जानना जरूरी है कि आप जो कर रहे हैं वो गलत है।

जानें इस दिन का इतिहास
बता दें कि दुनियाभर में "वर्ल्ड सुसाइड प्रिवेंशन डे" 2023 से मनाया जा रहा है। दुनिया में सुसाइड के बढ़ते केसों को देखकर खासकर युवाओं के द्वारा इस गलत कदम को उठाते देख चिंता बढ़ गई। वैश्विक स्तर पर इस विषय को लेकर चिंता बढ़ते देख अंतर्राष्ट्रीय आत्महत्या रोकथाम संघ (IASP) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने ऐसा कुछ करे का प्रयास किय जिससे सुसाइड जैसे कदम उठाने से पहले लोग ये जान लें कि वो जो कर रहे हैं वो गलत है। अब हर साल 10 सितंबर को इस खास दिन को मनाया जाता है।
क्य है इस बार "वर्ल्ड सुसाइड प्रिवेंशन डे" की थीम
हर सार "वर्ल्ड सुसाइड प्रिवेंशन डे" की थीम अलग होती है। आपको बता दें कि इस बार इस खास दिन की थीम 'Creating Hope Through Action' जिसका मतलब है छोटे-छोटे प्रयास भी किसी की जिंदगी को बचाने का काम कर सकते हैं।
युवा सुसाइड जैसे कदम न उठाएं इसके लिए क्या करें?
- जागरूकता बढ़ाने के लिए - आत्महत्या दुनिया भर में असमय मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है। लोगों को यह समझना जरूरी है कि यह कोई समाधान नहीं बल्कि एक मानसिक स्वास्थ्य संकट है।
- मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने के लिए - तनाव, अवसाद, अकेलापन, रिश्तों की टूटन और सामाजिक दबाव जैसे कारणों को समय रहते पहचान कर रोका जा सकता है।
- सहयोग और संवेदनशीलता के लिए - परिवार, दोस्त और समाज मिलकर मानसिक रूप से परेशान व्यक्ति को सहारा दें, ताकि वह अकेला महसूस न करे।
- स्टिग्मा (भेदभाव) खत्म करने के लिए - मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को छिपाने के बजाय खुलकर बात करने का माहौल बने। इससे ये होगा कि लोगों के मन में जो बुरे ख्याल आ रहे हैं वो खुलकर सामने आए और उनका समाधान हो सके।
- वैश्विक एकजुटता के लिए - यह दिन दुनिया को याद दिलाता है कि हर जीवन कीमती है और सामूहिक प्रयास से आत्महत्या की घटनाओं को कम किया जा सकता है।
क्यों आते हैं सुसाइड के ख्याल?
हर किसी को ये समझने की जरूरत है कि लोगों के मन में खासकर युवाओं के मन में सुसाइड के ख्याल क्यों आते हैं। एक्सपर्ट के अनुसार, आत्महत्या के विचार अक्सर असफलताओं, टूटे रिश्तों, बुलीइंग, सोशल मीडिया के दबाव और मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी से जुड़े होते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, समय रहते पहचान, सही परामर्श, परिवार और दोस्तों का साथ, तथा मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच युवाओं को इस अंधेरे से बाहर निकाल सकती है। हमें यह समझना होगा कि हर जीवन कीमती है और मदद मांगना कमजोरी नहीं, बल्कि साहस की निशानी है।आपातकालीन स्थिति में इन हेल्पलाइन का पर मदद के लिए फोन कर सकते हैं।
मदद के लिए इस्तेमाल करें हेल्पलाइन नंबर
वंद्रेवाला फाउंडेशन / CALL: 1860 266 2345
राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सहारा: 1800 599 0019
AASRA (सुसाइड प्रिवेंशन हेल्पलाइन): +91-9820466726
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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