Latest Updates
-
चेहरे पर पड़े चेचक के दाग हटाने के 5 घरेलू उपाय, जिद्दी गड्ढों और माता के निशान से पाएं छुटकारा -
क्यों मनाया जाता है World Rat Day? सबसे पहले किस देश में पैदा हुए चूहे, कैसे पूरी दुनिया में पहुंचे? -
International Carrot Day 2026: 4 अप्रैल को ही क्यों मनाया जाता है विश्व गाजर दिवस? जानें रोचक कहानी -
Bridal Blouse Designs: लेटेस्ट ब्राइडल ब्लाउज बैक डिजाइन, डोरी से लेकर हैवी एम्ब्रॉयडरी तक, देखें 7 पैटर्न्स -
कंडोम की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं? जानें ईरान-इजरायल युद्ध का असर और कपल्स के लिए सेफ्टी टिप्स -
Musibat ki Dua: दुख, तंगी और गम से निजात की इस्लामी दुआएं, इनके जरिए होती है अल्लाह से सीधी फरियाद -
कहीं आप प्लास्टिक राइस तो नहीं खा रहे आप? इन 5 आसान तरीकों से करें असली-नकली की पहचान -
Good Friday 2026: 'सब पूरा हुआ'... इन खास संदेशों और कोट्स के साथ अपनों को भेजें गुड फ्राइडे की शुभकामनाएं -
Aaj Ka Rashifal 3 April 2026: आज इन 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, जानें अपनी राशि का हाल -
गुड फ्राइडे पर घर पर बनाएं रुई जैसे सॉफ्ट 'हॉट क्रॉस बन्स', यहां देखें सबसे आसान रेसिपी
Diseases of Poultry: मुर्गियों को भी होता है सर्दी-जुकाम, जानिए मुर्गी पालने वाले क्या करें?
Diseases of Poultry: ठंड के मौसम में मुर्गियों के रख-रखाव का विशेष ध्यान रखना चाहिए। वरना ठंड में घूमने की वजह से मुर्गियों को खास कर चूजों को यह बीमारी हो जाती है। मुर्गियों का सुस्त रहना, कलगी में नीलापन, दाना पानी कम खाना एवं चोच से पतला स्राव आना प्रमुख लक्षण है।
यदि मुर्गीपालक मुर्गियों को ठंड से बचाएंगे तो अच्छा उत्पादन लेकर बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं। ठंड के समय में चूजों को रानीखेत (आरडी) का टीका लगवाएं। साथ ही पानी में विटामिन ए का प्रयोग अधिक मात्रा में करें। मुर्गी घरों के अंदर संतुलित गर्माहट बनाए रखने के लिए कुछ व्यवस्था करें, जिससे बाहर के वातावरण का प्रभाव मुर्गियों पर कम हो।

ये हैं रोग के लक्षण
- मुर्गियों का दिमाग (ब्रेन) प्रभावित होते ही शरीर का संतुलन लड़खड़ाता है। गर्दन लुढ़कने लगती है।
- सांस की नली के प्रभावित होने से सांस लेने में तकलीफ, मुर्गियां मुंह खोलकर सांस लेती है।
- पाचन तंत्र प्रभावित होने पर डायरिया की स्थिति बनती है। मुर्गियां पतला और हरे रंग का मल करने लगती है।
- कभी-कभी शरीर के किसी हिस्से को लकवा मार जाता है।
मुर्गी आवास की सफाई करें
पुराना बुरादा, पुराने बोरे, पुराना आहार एवं पुराने खराब पर्दे आदि अलग कर दें, या जला दें। आसपास का रुका पानी निकाल दें, उस जगह पर ब्लीचिंग पावडर या चूना का छिड़काव करें। फार्म के चारों ओर ऊगी घास, झाड़ को हटा दें। जिस गोदाम में मुर्गियों का दाना रखा है, वहां सफाई करें। कॉपर सल्फेटयुक्त चूने के घोल से पुताई कर दें।
दाने और पानी की खपत का ध्यान रखें
ठंड के मौसम में दाने की खपत बढ़ जाती है। यदि दाने की खपत बढ़ नहीं रही है तो इसका मतलब है कि मुर्गियों में किसी बीमारी का प्रकोप चल रहा है। ऐसे मौसम में मुर्गियों के पास हर समय दाना उपलब्ध रहना चाहिए। इस मौसम में पानी की खपत बहुत कम हो जाती है। मुर्गी इसे कम मात्रा में पी पाती है। इस स्थिति से बचने के लिए मुर्गियों को बार-बार शुद्ध ताजा पानी बदलकर दें।
मुर्गियों को ठंड से बचाना चाहिए। आवश्यकता होने पर 60-100 वाट का बल्ब मुर्गीघर में जलाना चाहिए। इससे कमरा गर्म रहता है। टेट्रासाइक्लीन दवा को इस बीमारी की रोकथाम या तीव्रता को कम करने में उपयोग किया जा सकता है। इसकी शिकार मुर्गियों को 3 माह में एक बार, 2-3 दिन तक लगातार दवा पिलाना चाहिए।
रोकथाम कैसे करें
बिछौना, मुर्गीघर एवं उसके आस पास की जगह की साफ सफाई का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए. टेट्रासाइक्लिन पाउडर, लिक्सेन पाउडर, फयूरासोल पाउडर-ये सभी दवा को आधी मात्रा में पीने वाले पानी में देने से इसकी रोकथाम की जा सकती है
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications











