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विराट को मिली कड़कनाथ चिकन खाने की सलाह, जाने क्या खास बात है इस ब्लैक चिकन की
हाल ही में भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली ने मांसाहार छोड़ वेगन डाइट अपनाने की बात कही। अधिक कॉलेस्ट्रॉल और फैट के कारण विराट ने अपना फेवरेट ग्रिल्ड चिकन भी छोड़ दिया था।
लेकिन हाल ही में भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली को झाबुआ के कड़कनाथ रिसर्च सेंटर (कृषि विज्ञान केंद्र) ने कड़कनाथ चिकन खाने की सलाह दी है। आइए जानते है कि आखिर क्यों वैज्ञानिकों ने विराट और उनके साथ टीम इंडिया को कड़कनाथ चिकन खाने की हिदायत दी है।

कालीमासी कहा जाता है
स्थानीय भाषा में कड़कनाथ को कालीमासी भी कहते हैं, क्योंकि इसका मांस, चोंच, जुबान, टांगे, चमड़ी आदि सब कुछ काला होता है। यह प्रोटीनयुक्त होता है और इसमें नाममात्र का वसा मौजूद होता है। विशेषज्ञों का दावा है कि दिल और डायबिटीज के रोगियों के लिए कड़कनाथ बेहतरीन दवा होती है।

फैट कम, प्रोटीन ज्यादा
कड़कनाथ का पूरे देशभर में काफी डिमांड है। इसमें दूसरी मुर्गा प्रजातियों के मांस के मुकाबले चर्बी और कोलेस्ट्रॉल काफी कम होता है, जबकि प्रोटीन और आयरन की मात्रा अपेक्षाकृत ज्यादा होता है। कड़कनाथ में 25 प्रतिशत प्रोटीन होता है, जबकि बाकी मुर्गों में 18-20 फीसदी प्रोटीन ही पाया जाता है।

सेक्स पॉवर भी बढ़ाता है
इसके अलावा कड़कनाथ को यौन शक्ति वर्धक भी माना जाता है।इसमें विटामिन बी1स बी2, बी6 और बी12 भरपूर मात्रा में मिलता है। इतना ही नहीं इसका मांस खाने से आंखों की रोशनी भी बढ़ती है।

गर्म होती है तासीर
कड़कनाथ मुर्गे की तासीर गर्म होती है, इसलिए इसे ऐसी ग्रेवी के साथ पकाया जाता है जिसकी तासीर ठंडी हो। इसमें चिकन बनाने से पहले ग्रेवी को अलग से बनाया जाता है। इसमें घी, हींग जीरा मेथी, अजवाइन, साथ ही धनिया पाउडर डाला जाता है। इसके बाद इसमें चिकन को मिलाकर बनाया जाता है। कालीमासी बहुत नर्म होता है इसलिए इसे आसानी से पकाया जा सकता है।

कहां मिलता है?
कड़कनाथ मध्यप्रदेश के झाबुआ और धार इलाके में बहुतायत में पाया जाता है। जबकि छत्तीसगढ़, राजस्थान और गुजरात के कुछ हिस्सों में यह मिलता है। हालांकि इसकी मांग अब देश के कोने-कोने से आ रही है। इस प्रजाति के मुर्गी के अंडे काफी महंगे होते हैं। इसका एक अंडा करीब 50 रुपये में बिकता है। इसका चिकन मार्केट में 1 से 2 हजार के बीच बिकता है।



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