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सावन के तीसरे सोमवार पर भद्रा का संकट! शिवलिंग पर जल चढ़ाने से पहले जान लें शुभ मुहूर्त
Sawan Third Somwar: सावन का महीना शिवभक्तों के लिए बेहद पावन और फलदायी माना जाता है। अभी यही पावन महीना चल रहा है जिसमें शिवभक्त भोले बाबा की पूजा करते हैं और व्रत रखते हैं। सावन में सबसे ज्यादा सोमवार का महत्व होता है जिस दिन लोग व्रत रख शिवजी को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं। दरअसल सोमवार को शिव की विशेष पूजा का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। ऐसे में हर सोमवार को भक्त शिवलिंग पर जल, बेलपत्र और दूध चढ़ाकर भोलेनाथ को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं।
लेकिन इस बार सावन के तीसरे सोमवार यानी 29 जुलाई 2025 को भद्रा का साया पड़ रहा है, जो शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना जाता है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या सोमवार का व्रत और पूजा भद्रा काल में की जा सकती है? और शिवलिंग पर जलाभिषेक करने का शुभ मुहूर्त क्या होगा? आइए जानते हैं सावन के तीसरे सोमवार से जुड़ी सभी जरूरी जानकारी, पूजा का सही समय और भद्रा के प्रभाव से कैसे बचें।

सावन के तीसरे सोमवार की तिथि व मुहूर्त
28 जुलाई 2025 को सावन का तीसरा सोमवार है जो शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को है। इस दिन पूर्व फाल्गुनी नक्षत्र और परिघा योग बन रहा है। शिव पूजा का शुभ समय सुबह 4 बजे से शुरू होगा। अभिजीत मुहूर्त 11 बजकर 57 मिनट से लेकर 12 बजकर 50 मिनट कर रहेगा। वहीं राहु काल सुबह 7 बजकर 22 मिनट से 9 बजकर 3 मिनट तक रहेगा।
तीसरे सोमवार पर है भद्रा काल का साया
सावन के तीसरे सोमवार को भद्रा काल भी पड़ रहा है। हिंदू धर्म के अनुसार, भद्रा काल में पूजा-पाठ करना और शुभ काम करना वर्जित होता है। बता दें कि भद्रा काल सुबह 10 बजकर 57 मिनट से शुरू होगा और 11 बजकर 24 मिनट तक रहेगा। ऐसे में भद्रा काल शुरू होने से पहले जलाभिषेक कर लेना उत्तम हैं। मान्यता है कि भद्रा काल में की गई पूजा का फल निष्फल हो सकता है।

सावन के तीसरे सोमवार को ऐसे करें शिव पूजा
सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।
शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शहद, बेलपत्र, गंगाजल और चंदन अर्पित करें।
"ॐ नमः शिवाय" का जाप करें और शिव चालीसा पढ़ें।
व्रत रखते हुए एक समय फलाहार लें।
शाम को दीप जलाकर भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें।
सावन सोमवार का महत्व
सावन सोमवार का व्रत विशेषकर विवाह, संतान सुख, और मनोकामना पूर्ति के लिए रखा जाता है। ऐसा माना जाता है कि सच्चे मन से उपवास और शिव आराधना करने से भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में बताए गए रत्नों के लाभ पारंपरिक मान्यताओं और ज्योतिषीय अनुभवों पर आधारित हैं। हर इंसान पर इसका असर अलग हो सकता है। किसी भी रत्न को पहनने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी या रत्न विशेषज्ञ से जरूर सलाह लें। यह लेख सिर्फ जानकारी देने के उद्देश्य से है और इसे प्रोफेशनल सलाह का विकल्प न समझें।



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