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दशहरा के दिन शमी पूजन के अलावा इन कामों को करने की भी है परंपरा
पूरे देश में दशहरा या विजयदशमी का त्योहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। यह भारत की शौर्यता और वीरता भरी संस्कृति का प्रतीक है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी को दशहरा का पर्व मनाया जाता है। यह पर्व विजयदशमी और आयुध पूजा के नाम से भी जाना जाता है।

यह हिंदुओं के प्रमुख त्योहारों में से एक है जिसका उत्सव पूरा देश मनाता है। दशहरे के दिन भगवान राम और दुर्गा माता की विशेष पूजा की जाती है। दशहरा उत्सव के दिन कई ऐसे कार्य करने की परंपरा है जिससे जीवन में शुभता आती है।

करें शमी वृक्ष का पूजन
प्रचलित पौराणिक कथा के अनुसार माना जाता है कि महाभारत के समय में पांडवों ने शमी के वृक्ष के ऊपर अपने सभी अस्त्र तथा शस्त्र छिपा दिए थे और इसके बाद कौरवों के साथ युद्ध में उन्हें जीत हासिल हुई थी। विजयदशमी के दिन शमी का पूजन किया जाता है। इस दिन घर की पूर्व दिशा में शमी की टहनी प्रतिष्ठित करें और विधिपूर्वक पूजन करें। दशहरा के दिन पूजन करने से घर-परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है। महिलाओं को अखंड सौभग्य की प्राप्ति होती है। इतना ही नहीं, शमी पूजन से शनि के अशुभ प्रभावों से मुक्ति मिलती है।

पान है विजय का प्रतीक
दशहरा के दिन हनुमानजी को मीठी बूंदी का भोग लगाएं और उसके बाद उन्हें पान चढ़ाएं। इस दिन रावण दहन के बाद पान का बीड़ा खाया जाता है। यह भक्तों द्वारा सत्य की जीत की खुशी को दर्शाता है। इस दिन विशेषतौर पर पान खाने और खिलाने का चलन है।

नीलकंठ के दर्शन से पूरी होगी कामना
नीलकंठ पक्षी को भगवान शिव का प्रतिनिधि माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि रावण पर विजय पाने की कामना से प्रभु श्री राम ने सबसे पहले नीलकंठ पक्षी के दर्शन किए थे। विजयदशमी के दिन नीलकंठ के दर्शन करने चाहिए और भगवान शिव का आशीर्वाद लेना चाहिए। ऐसा करने से जीवन में धन-धान्य, भाग्योदय तथा सुख-समृद्धि का वास होता है।



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