Latest Updates
-
Easter Sunday 2026: क्यों मनाया जाता है 'ईस्टर संडे'? जानें ईसाई धर्म में इसका महत्व और इतिहास -
लाल, काली या नारंगी, सेहत के लिए कौन सी गाजर है सबसे ज्यादा पावरफुल? -
Delhi-NCR में भूकंप के झटको से कांपी धरती, क्या बाबा वेंगा की खौफनाक भविष्यवाणी सच होने वाली है? -
Aaj Ka Rashifal 4 April 2026: शनिवार को इन 5 राशियों पर होगी धनवर्षा, जानें अपनी राशि का भाग्य -
चेहरे पर पड़े चेचक के दाग हटाने के 5 घरेलू उपाय, जिद्दी गड्ढों और माता के निशान से पाएं छुटकारा -
क्यों मनाया जाता है World Rat Day? सबसे पहले किस देश में पैदा हुए चूहे, कैसे पूरी दुनिया में पहुंचे? -
International Carrot Day 2026: 4 अप्रैल को ही क्यों मनाया जाता है विश्व गाजर दिवस? जानें रोचक कहानी -
Bridal Blouse Designs: लेटेस्ट ब्राइडल ब्लाउज बैक डिजाइन, डोरी से लेकर हैवी एम्ब्रॉयडरी तक, देखें 7 पैटर्न्स -
कंडोम की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं? जानें ईरान-इजरायल युद्ध का असर और कपल्स के लिए सेफ्टी टिप्स -
Musibat ki Dua: दुख, तंगी और गम से निजात की इस्लामी दुआएं, इनके जरिए होती है अल्लाह से सीधी फरियाद
Ugadi Festival 2022: कभी न पूजे जाने वाले ब्रह्मा जी की क्यों होती है इस दिन पूजा, जानें यहां
चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को उगादी का त्यौहार मनाया जाता है। दक्षिण भारत में इस पर्व का बड़ा ही महत्व होता क्योंकि इस दिन से वहां नए साल की शुरुआत होती है। उगादी के दिन से ही चैत्र नवरात्रि की भी शुरुआत होती है। इसके अलावा इस त्यौहार को नए फैसलों के आगमान के रूप में भी जाना जाता है। कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना जैसे राज्यों में इसे बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है। वहीं महाराष्ट्र में इस दिन गुड़ी पड़वा मनाते हैं।
इस महान पर्व से जुड़ी कई मान्यताएं है जिनके बारे में यहां हम आपको बताएंगे। तो आइए आपको बताते हैं।

साल 2022 में कब है उगादी
इस वर्ष उगादी 02 अप्रैल शनिवार को मनाया जाएगा। 01 अप्रैल दोपहर 11 बजकर 53 मिनट पर चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि की शुरुआत हो जाएगी। वहीं अगले दिन 02 अप्रैल 11 बजकर 58 मिनट पर प्रतिपदा तिथि की समाप्ति हो जाएगी।

ब्रह्मा जी ने की थी संसार की रचना
पौराणिक कथा के अनुसार इस दिन ब्रह्मा जी ने श्रृष्टि की रचना की थी। वैसे तो भगवान शंकर के श्राप की वजह से ब्रह्मा जी की पूजा नहीं होती है, लेकिन उगादी के दिन लोग ब्रह्मदेव की पूजा पूरी विधि विधान से करते हैं। एक अन्य कथा के अनुसार इस दिन भगवान श्री राम और राजा युधिष्ठिर का राज्य अभिषेक हुआ था। वहीं भगवान विष्णु ने इस शुभ दिन पर मत्स्य अवतार लिया था।

कैसे मनाते हैं उगादी?
जैसा कि हमने आपको बताया कि उगादी दक्षिण भारत का बहुत ही खास त्योहार है, इसलिए इस पर्व को बहुत ही खास तरीके से मनाया जाता है। इस त्यौहार के आने से पहले ही लोग अपने घरों की साफ सफाई शुरू कर देते हैं। कुछ जगहों पर लोग अपने घर की पुताई सफेद रंग से करते हैं। घर के बाहर रंगोली बनाते हैं और चौखट पर आम के पत्तों का बंदनवार लगाते हैं।
उगादी के दिन लोग अपने घरों में ब्रह्मा जी की तसवीर या मूर्ति की स्थापना करते हैं और उनकी पूजा करते हैं। वहीं इस दिन लोग मंदिर में भी पूजा करते हैं। उगादी पर उबटन और तिल का तैल लगाकर स्नान किया जाता है।

बनते हैं तरह तरह के पकवान
इस त्यौहार के दिन बोवत्तु जो एक प्रकार का व्यंजन होता है, इसे जरूर बनाया जाता है। इसके अलावा इस दिन बेवु-वेल्ला भी बड़े ही चाव से खाया जाता है। इसे खाते समय मंत्र का भी उच्चारण किया जाता है। इन व्यंजनों के साथ पच्छाड़ी नामक पेय पदार्थ भी पिया जाता है, जिसमें 6 प्रकार का स्वाद होता है। यह सभी आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में बहुत ही मशहूर डिश है।

नए कार्य के लिए होता है शुभ दिन
उगादी के दिन नए साल की शुरुआत होती है। इस दिन को लोग बहुत ही शुभ मानते हैं। यही वजह है कि किसी भी नए कार्य की शुरुआत करने के लिए लोग उगादी का दिन चुनते हैं फिर चाहे अपना कोई नया व्यापार शुरू करना हो, नए घर की खरीदारी हो या फिर गृह प्रवेश। माना जाता है इस दिन अच्छे काम करने से मनचाहा परिणाम मिलता है।



Click it and Unblock the Notifications











