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क्यों शिव को श्रृंगार में पसंद है भस्म, जाने महाकाल की भस्माआरती से जुड़े रोचक तथ्य
भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक उज्जैन में स्थित महाकाल है। इस ज्योतिर्लिंग की पूजा में एक विशेष पराम्परा है जो इस ज्योतिर्लिंग को बाकी के ज्योतिर्लिंगों में से अलग बनाता हैं। हर सुबह यहां होने वाली मंगला आरती में भगवान का शिव का अभिषेक भस्म से किया जाता है। इसी वजह से इसे भस्मारती भी कहा जाता है। आइए जानते है कि आखिर क्यों शिव को श्रृंगार में भस्म चढ़ाई जाती है।
माना जाता है कि शरीर पर भस्म लगाकर भगवान शिव खुद को मृत आत्मा से जोड़ते हैं। उनके अनुसार मरने के बाद मृत व्यक्ति को जलाने के पश्चात बची हुई राख में उसके जीवन का कोई कण शेष नहीं रहता। ना उसके दुख, ना सुख, ना कोई बुराई और ना ही उसकी कोई अच्छाई बचती है। शरीर नश्वर है और आत्मा अनंत है। आइए जानते है महाशिवरात्रि के मौके पर शिव और भस्म का आपस में सबंध के बारे में।

क्यों लगाया जाता है भस्म?
शिवपुराण की कथा है कि भगवान शिव ने देवी सती के देह त्याग के बाद अपनी सुध-बुध खो दी थी। देवी सती के शव को लेकर भगवान शिव तांडव मचाने लगे थे। भगवान विष्णु ने शिव का मोहभंग करने के लिए चक्र से सती के शव के टुकड़े-टुकड़े कर दिए। सती के वियोग में शिव औघड़ और दिगम्बर रुप धारण कर श्मसान में बैठ गए और उस भस्म को अपनी पत्नी की आखिरी निशानी मानते हुए पूरे शरीर में चिता की भस्म लगा लिया। तब से भस्म भी शिव का श्रृंगार बन गया।

पहले जिंदा चिता की भस्म लगाई जाती थी
पहले महाकाल की भस्म आरती के लिए श्मसान से चिता की भस्म मंगाई जाती थी। लेकिन अब इस पराम्परा में नया बदलाव लाते हुए कपिला गाय के गोबर से बने कंडे, बेर, पीपल, अमलतास, बड़ और शमी की लकड़ियों से भस्म तैयार कर इसका प्रयोग किया जाता है।

महिलाओं को नहीं देखना चाहिए भस्मारती
महाकाल मंदिर में मान्यता है कि जब भगवान को भस्मी अर्पित की जाती है तो वे दिगंबर रूप में होते हैं। उस समय महिलाएं उन्हें नहीं देखतीं। आरती में शामिल महिलाएं घूंघट निकाल लेती हैं। भस्मी अर्पित होने के बाद घूंघट हटा लेती हैं। हालांकि इस विषय में भी विशेषज्ञों के कई मत है।

भस्म मलने का वैज्ञानिक कारण
आपने कुंभ मेले में या शिव के भक्त अघोरी बाबाओं को शरीर में भस्म लगी हुई देखी होगी। शरीर पर भस्म लगाने में सर्दियों में ठंड लगती है और गर्मियों में सूखापन महसूस नहीं होता है। दरअसल, भस्म को शरीर पर मलने से त्वचा के रोमछिद्र बंद हो जाते हैं। इस कारण शरद ऋतु में रोम छिद्र बंद होने से सर्दी का अहसास कम होता है। भस्म लगाने से मक्खी- मच्छर भी नहीं काटते हैं। इसलिए शिव के अनुयायी अघोरी अपने शरीर में हर वक्त भस्म मलते हैं।

क्या है भस्म का महत्व
शिवपुराण के अनुसार राख यानी भस्म सृष्टि का सार है, सब कुछ अंत में राख ही हो जाना है। इसलिए भगवान शिव अपने पूरे शरीर पर भस्म लगाए रहते हैं। सृष्टि के विंध्वस के लिए भगवान शिव प्रतीक है और भस्म भी विंध्वस का ही प्रतीक है। इसलिए शरीर पर भस्म रमाना बताता है कि जीवन नश्वर है।
शरीर नशव्र है इसलिए ये भी एक दिन भस्म की तरह ही हो जाएगी। वहीं आत्मा अनंत है और जीवित रहेगी।



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